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Toll Tax: केरल हाई कोर्ट का फैसला- सुरक्षित और सुगम एक्सेस के बिना नहीं वसूली जा सकती टोल फीस

Thu, 07 Aug 2025 09:45 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केरल हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जब तक लोगों को हाईवे पर बिना रुकावट, सुरक्षित और सुचारू रूप से आने-जाने की सुविधा नहीं दी जाती, तब तक टोल वसूलना जायज नहीं है।
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केरल उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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केरल हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जब तक लोगों को हाईवे पर बिना रुकावट, सुरक्षित और सुचारू रूप से आने-जाने की सुविधा नहीं दी जाती, तब तक टोल वसूलना जायज नहीं है। अदालत ने यह फैसला एनएच 544 के एदापल्ली-मन्नुथी हिस्से पर चार हफ्तों के लिए टोल वसूली पर रोक लगाते हुए सुनाया।
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याचिकाओं के आधार पर लिया गया फैसला
यह निर्णय उस वक्त आया जब इस टोल वसूली को लेकर कई याचिकाएं अदालत में दायर की गईं थीं। इन याचिकाओं में दावा किया गया था कि निर्माण कार्य और सर्विस रोड की खराब हालत के चलते उस हिस्से पर भारी ट्रैफिक जाम लग रहा है। जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

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"जनता का भरोसा ही सबसे बड़ा अधिकार है"
न्यायमूर्ति ए मुहम्मद मुस्ताक और हरिशंकर वी मेनन की खंडपीठ ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) (एनएचएआई) की जिम्मेदारी है कि वह सड़कों पर ट्रैफिक की सुगमता बनाए रखे। अदालत ने कहा, "अगर जनता का भरोसा टूटता है तो फिर कानून के तहत टोल वसूली का अधिकार भी जनता पर थोपा नहीं जा सकता।"

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National Highway - फोटो : X/@nitin_gadkari
NHAI के अनुबंध वाले तर्क को खारिज किया गया
एनएचएआई की तरफ से अदालत में यह दलील दी गई कि टोल वसूली एक कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) के तहत होती है, और इसे रोकना कानूनी जटिलताओं को जन्म दे सकता है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि अगर जनता को उस टोल के बदले हाईवे की पूरी सुविधाएं नहीं मिल रहीं, तो फिर केवल कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर टोल वसूली नहीं की जा सकती।

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टोल वसूली सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय
कोर्ट ने यह भी कहा कि टोल वसूली सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट पर आधारित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे सार्वजनिक सेवा का उद्देश्य भी होता है। अगर उस उद्देश्य को पूरा नहीं किया जा रहा है, तो फिर टोल वसूलने का कोई नैतिक या कानूनी आधार नहीं बचता।

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National Highway - फोटो : X@nitin_gadkari
जनता के हित सर्वोपरि
अदालत ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हर सार्वजनिक प्रोजेक्ट में लोगों के हित को सर्वोपरि रखे। चाहे किसी प्राइवेट कंपनी के साथ समझौता हो, इससे सरकार अपनी मूल जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने कहा, "अगर एनएचएआई या उसके एजेंट जनता को बिना रुकावट हाईवे पर चलने की सुविधा नहीं दे पा रहे, तो यह जनता की वैध उम्मीदों के खिलाफ है।"

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सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल
एनएच 544 पर टोल वसूली के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि एनएचएआई ने जनता की शिकायतों को नजरअंदाज किया है। अदालत ने कहा कि फरवरी 2025 से ही इन समस्याओं की जानकारी एनएचएआई को दी जाती रही। लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार से समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

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National Highway - फोटो : AI
केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में सरकार की प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठते हैं और ऐसे मामलों में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सिर्फ केंद्र ही ऐसी स्थिति में टोल दरों में कटौती या टोल वसूली को स्थगित करने का अधिकार रखता है। 

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