ड्राइवर से ज्यादा जिम्मेदार टेस्ला की तकनीक
इस मामले में पीड़ितों का कहना था कि हादसे के वक्त गाड़ी चला रहा ड्राइवर मोबाइल में व्यस्त था। लेकिन बावजूद इसके जूरी ने माना कि पूरी गलती उसकी नहीं थी। टेस्ला की तकनीक उस स्थिति में ठीक से काम नहीं कर पाई, इसलिए कंपनी को भी जिम्मेदार ठहराया गया। यह फैसला उस समय आया है जब एलन मस्क अमेरिकी जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी कारें अब खुद से सुरक्षित तरीके से चल सकती हैं। वह जल्द ही कुछ शहरों में ड्राइवरलेस टैक्सी सेवा शुरू करने की तैयारी में हैं।
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चार साल पुराने केस का ऐतिहासिक अंत
यह मुकदमा करीब चार साल तक चला और खास बात यह रही कि यह ट्रायल तक पहुंचा। टेस्ला के खिलाफ अधिकतर ऐसे मामले या तो कोर्ट में खारिज हो जाते हैं या कंपनी पहले ही समझौता कर लेती है ताकि पब्लिक ट्रायल से बचा जा सके। लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ और नतीजा कंपनी के लिए बड़ा झटका बन गया।
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अब और लोग भी कोर्ट जाएंगे
कार दुर्घटना मामलों में काम करने वाले वकील मिगुएल कस्टोडियो का कहना है, "यह फैसला एक तरह से दरवाजे खोल देगा। अब और भी लोग कोर्ट का रुख करेंगे।" वो इस केस से जुड़े नहीं थे, लेकिन फैसले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी।
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सबूत छिपाने के आरोप भी लगे
मामले में मृतका 22 वर्षीय नायबेल बेनाविदेस लियोन और उसके घायल प्रेमी डिलन एंगुलो के वकीलों ने टेस्ला पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कंपनी ने हादसे से ठीक पहले की रिकॉर्डिंग और डेटा या तो छुपा लिया या फिर 'गुम' कर दिया। हालांकि, बाद में जब वकीलों ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट से जांच कराई तो वही सबूत सामने आए जो टेस्ला बार-बार कह रही थी कि उसके पास नहीं हैं। बाद में कंपनी ने कहा कि यह गलती से हुआ और उन्हें लगा ही नहीं कि वह डेटा मौजूद था।
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टेस्ला की सुरक्षा की छवि पर असर
यह अभी तय नहीं है कि इस फैसले से टेस्ला की सुरक्षा की छवि पर कितना असर पड़ेगा। लेकिन इतना जरूर है कि हादसा 2019 में हुआ था और तब से अब तक कंपनी की ऑटोपायलट तकनीक में काफी सुधार हो चुका है। यह दुर्घटना एक सुनसान और अंधेरी सड़क पर की-लार्गो, फ्लोरिडा में हुई थी।
फिलहाल, इस केस ने एक बार फिर टेस्ला की ऑटोपायलट टेक्नोलॉजी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। और कंपनी को अपनी पारदर्शिता और सुरक्षा रिकॉर्ड को लेकर सावधानी बरतनी होगी।
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