स्टडी के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों का रुख निष्पक्ष है। लोगों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण के लिये लाभकारी हैं। लोगों का यह भी कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में सुविधाओं का होना जरूरी है। स्टडी में यह बात सामने आई है कि ग्लोबल मार्केट में इलेक्ट्रिक वाहनों ही हिस्सेदारी 10 फीसदी पहुंचने में कम से कम पांच सालों का वक्त लगेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोक्ता की पहुंच से बाहर होना और विश्वास इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए शीर्ष चुनौतियों हैं। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी (जिसमें कीमत, रेंज और सप्लाई कैपेसिटी शामिल है) मुख्य मुद्दा हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सर्वे में शामिल होने वाले 61 फीसदी लोगों का कहना है कि यह पर्यावरण के अच्छी हैं, वहीं 48 फीसदी लोगों ने चार्जिंग की कीमत की तुलना पेट्रोल की कीमत से करते हुए इसे फायदेमंद बताया। वहीं 64 फीसदी लोगों ने चार्जिंग स्टेशंस और 59 फीसदी लोगों ने इसकी रेंज को लेकर आशंका जाहिर की। जबकि 77 फीसदी लोगों ने उम्मीद जताई कि इलेक्ट्रिक वाहनों की रेंज 300 मील से ज्यादा होनी चाहिए। वहीं 74 फीसदी लोगों का कहना था कि 200 मील की दूरी तय करने के लिए वे आधा घंटे की चार्जिंग का इंतजार कर सकते हैं।
68 फीसदी ग्राहकों का कहना है कि उन्हें इससे पहले बैटरी–इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का कोई अनुभव नहीं है। वहीं 75 फीसदी लोगों का कहना है कि वे फिर से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना पसंद करेंगे, वहीं पहले कभी इलेक्ट्रिक वाहन नहीं खरीदने वाले लोगों में 40 फीसदी का कहना है कि वे इसके बारे में सोच सकते हैं। वहीं 78 फीसदी का कहना है कि इलेक्ट्रिक कार खरीदने के फैसले में सब्सिडी और क्रेडिट का अहम योगदान होगा।
24 जून से लेकर 2 जुलाई के बीच जेडी पावर और सर्वेमंकी के किए इस संयुक्त सर्वे में 5,270 ग्राहकों ने हिस्सा लिया। जिसमें ग्राहकों ने लो (0 से 40), न्यूट्रल (41-60) और पॉजिटिव (61-100) की रेटिंग दी।