रिपोर्ट के मुताबिक, समृद्ध वित्तपोषण वाले पारिस्थितिकी तंत्र के साथ भारत में वाहन क्षेत्र में नवाचार के अगुवा बनने की क्षमता है। वैश्विक ऑटोमोटिव अनुसंधान व विकास और सॉफ्टवेयर बाजार के 2030 तक तीन गुना बढ़कर 400 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
निर्यात के दम पर भारतीय वाहन क्षेत्र में 2035 तक एक लाख करोड़ डॉलर का उद्योग बनने की क्षमता है। आर्थर डी लिटिल की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योग विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी में बढ़त के जरिये उद्योग इस आकार को हासिल कर सकता है।
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आर्थर डी लिटिल के प्रबंधन भागीदार (भारत-दक्षिण एशिया) बार्निक चित्रन मैत्रा ने कहा, भारत का वाहन उद्योग वैश्विक बाजारों के अनुसार डिजाइन, विकास व उत्पादन के मामले में वैश्विक केंद्र बन सकता है। इसे पाने के लिए विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को भरोसेमंद व प्रतिस्पर्धी वैश्विक विनिर्माण में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा, वाहन सॉफ्टवेयर व ईआरएंडडी (इंजीनियरिंग अनुसंधान व विकास) में जोनल आर्किटेक्चर और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम जैसे उभरते रुझानों के अनुरूप समाधान पेश कर भारत की ताकत बढ़ सकती है।
नवाचार के जरिये लाभ उठा सकता है भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, समृद्ध वित्तपोषण वाले पारिस्थितिकी तंत्र के साथ भारत में वाहन क्षेत्र में नवाचार के अगुवा बनने की क्षमता है। वैश्विक ऑटोमोटिव अनुसंधान व विकास और सॉफ्टवेयर बाजार के 2030 तक तीन गुना बढ़कर 400 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत दुनिया के सॉफ्टवेयर केंद्र और ऐसी गतिविधियों के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थिति का लाभ उठा सकता है।