EV स्टार्टअप्स भी नहीं हैं परफेक्ट
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एक ही टीम से चल रहे EV और ICE प्रोजेक्ट्स
रिपोर्ट में बताया गया है कि कई वाहन निर्माता एक ही टीम और प्रोसेस के जरिए इलेक्ट्रिक और पारंपरिक (ICE) वाहन प्रोजेक्ट्स को एक साथ चला रहे हैं, जिससे इंजीनियरिंग, खरीदारी और टेस्टिंग विभागों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यहां तक कि EV के लिए अलग बनाई गई टीमें भी पुरानी प्रक्रियाओं का पालन कर रही हैं, जो उन्हें धीमा बना रही हैं।
सप्लायर्स पर भी बढ़ रहा प्रेशर
ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां भी इस दबाव से जूझ रही हैं। उन्हें कई कंपनियों के लिए एक साथ जटिल प्रोजेक्ट्स पर काम करना पड़ता है, जबकि उन्हें पहले से न तो स्पष्ट टाइमलाइन मिलती है और न ही सही डिजाइन। इससे बार-बार बदलाव होते हैं, लागत बढ़ती है और इंजीनियरिंग टीम थक जाती है।
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पाटकी ने कहा, “अगर OEMs चाहते हैं कि डिलीवरी समय पर हो, तो उन्हें सप्लायर्स को शुरुआत से ही शामिल करना होगा। उन्हें सिर्फ सोर्सिंग प्रोसेस का हिस्सा नहीं, बल्कि डिजाइन और प्रोडक्ट प्रायोरिटी तय करने में भी भागीदार बनाना होगा।”
EV स्टार्टअप्स भी नहीं हैं परफेक्ट
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि EV स्टार्टअप्स भले ही पुराने मॉडल्स का बोझ नहीं झेल रहे, लेकिन वे भी जल्दी-जल्दी लॉन्च का वादा करके बाद में OTA अपडेट्स जैसे डिजिटल फिक्स पर निर्भर हो जाते हैं। यह ट्रस्ट तोड़ सकता है और लॉन्ग टर्म में ज्यादा खर्चीला भी साबित हो सकता है।
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क्या है समाधान
वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप का सुझाव है कि कंपनियों को केवल लागत घटाने के बजाय एक-दूसरे के साथ असली साझेदारी करनी होगी। डिजाइन के शुरुआती चरण से ही सप्लायर्स को जोड़ना होगा और रिस्क साझा करना होगा। इसके अलावा, रियल-टाइम प्रोग्रेस ट्रैकिंग जैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दशक में वही कंपनियां सफल होंगी जो सिर्फ प्रोटोटाइप नहीं, बल्कि समय पर लॉन्च करके तेजी से स्केल और सुधार कर सकेंगी। इसलिए पुराने सिस्टम को बार-बार पैच करने के बजाय नए सिस्टम तैयार करने की जरूरत है।”