ग्रीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट का विकल्प
हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत है कि यह बिजली से चलती है, लेकिन इसकी पावर ट्रेन के भीतर ही बनती है। जहां सामान्य इलेक्ट्रिक ट्रेन ऊपर से तारों से बिजली लेती है, वहीं हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नॉलजी का इस्तेमाल होता है।
इस तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से ऊर्जा पैदा होती है और इसका एकमात्र बायप्रोडक्ट होता है - पानी का वाष्प। यानी इसमें कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल भी नहीं होता।
यह भी पढ़ें - Tesla in India: भारत में टेस्ला की धूम नहीं! इसकी वजह कीमत या मस्क का है असर?
इस बिजली को ट्रेन की बैटरियों में स्टोर किया जाता है, जिससे ट्रेन को तेज गति और चढ़ाई चढ़ने में मदद मिलती है। साथ ही इसमें रेजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक होती है, जो ब्रेक लगाने पर बनी ऊर्जा को दोबारा बैटरी में जमा कर देती है।
ग्रीन हाइड्रोजन, जो पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से रिन्यूएबल एनर्जी की मदद से बनती है, इस तकनीक का मूल है। यही इसे पूरी तरह पर्यावरण-हितैषी बनाता है।
यह भी पढ़ें - 2026 Kawasaki Ninja ZX-6R: 2026 कावासाकी निंजा ZX-6R भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या हुए बदलाव
लागत और प्लान
भारतीय रेलवे हर साल भारी मात्रा में डीजल इस्तेमाल करता है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और ईंधन की बचत भी होगी।
हाल ही में चेन्नई में 1200 HP हाइड्रोजन ट्रेन कोच का सफल ट्रायल हुआ। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे अब 35 हाइड्रोजन ट्रेनें लॉन्च करेगा, जिन पर प्रति ट्रेन लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च आएगा। इसके अलावा हर रूट पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह भी पढ़ें - 2025 Maruti Suzuki Ertiga: 2025 मारुति सुजुकी अर्टिगा नए फीचर्स के साथ अपडेट, जानिए पूरी डिटेल
यह भी पढ़ें - MLFF: गुजरात में शुरू होगा देश का पहला मल्टी-लेन फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम, अब बिना रुके भर पाएंगे टोल
पहला रूट: जींद-सोनीपत
हाइड्रोजन ट्रेन का पहला रूट जींद- सोनीपत कॉरिडोर (नॉर्दर्न रेलवे) चुना गया है। यह 356 किलोमीटर लंबा रूट है, जिस पर रोजाना दो बार ट्रेनों का आवागमन होगा। इससे ट्रेनों की परफॉर्मेंस, एफिशियंसी और फ्यूल इकॉनमी का डाटा इकट्ठा किया जाएगा।
इन ट्रेनों की इंजीनियरिंग और फिटिंग का काम चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और मेधा सर्वो ड्राइव्स द्वारा किया जाएगा। हर ट्रेन में दोनों सिरों पर हाइड्रोजन इंजन होंगे और बीच में 8 कोच होंगे, जिनमें एक बार में 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे।
यह भी पढ़ें - Hyundai Creta King Edition: ह्यूंदै क्रेटा के 10 साल पूरे, लॉन्च हुआ नया किंग एडिशन, जानें क्या है खास
यह भी पढ़ें - Vintage Cars: उत्तर प्रदेश में अब MoRTH नियमों के तहत होगा विंटेज गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन, जानें फीस और नियम