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Traffic Jam: क्या मेट्रो शहरों में ट्रैफिक जाम के हालात और खराब होने वाले हैं? राघव चड्ढा ने की यह मांग

Fri, 27 Mar 2026 11:01 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने ट्रैफिक जाम की समस्या की विकराल होती समस्या के मद्देनजर, तत्काल समाधान की मांग करते हुए 'नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन' का प्रस्ताव रखा है। यह एक ऐसी योजना है जो शहर प्रशासन को वाहनों के आवागमन को व्यवस्थित करने में मदद करेगी।
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Raghav Chaddha on Traffic Jam - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा है कि भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम अब गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं, अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए।

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किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मीटिंग में शामिल होने वाले लोगों की कहानियां, जो भारी ट्रैफिक में फंसे होते हैं, सोशल मीडिया पर जरूर वायरल हो जाती हैं। लेकिन ये कहानियाँ समय के रचनात्मक इस्तेमाल से ज्यादा, समय की बर्बादी को दिखाती हैं।
राघव चड्ढा ने शुक्रवार, 27 मार्च को दावा किया कि दिल्ली के ट्रैफिक में एक व्यक्ति औसतन हर साल 104 घंटे बिताता है, जबकि बंगलूरू के यात्री हर साल कम से कम 168 घंटे बिताते हैं, यानी हफ्ते के सात दिन। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए चड्ढा ने कहा कि यह कड़वी सच्चाई भारत के मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर असर डालती है।
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उन्होंने तुरंत समाधान की मांग की और 'नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन' का प्रस्ताव रखा। यह एक ऐसी योजना है जो शहर के प्रशासन को वाहनों के आवागमन को व्यवस्थित करने में मदद करेगी।

लोग साल में कितना समय ट्रैफिक में बर्बाद करते हैं?
चड्ढा के अनुसार, अलग-अलग शहरों में लोग हर साल काफी समय ट्रैफिक में गंवाते हैं:

  • दिल्ली: लगभग 104 घंटे

  • बंगलूरू: 168 घंटे (करीब 7 दिन)

  • मुंबई: 126 घंटे

  • कोलकाता: 110 घंटे

  • पुणे: 152 घंटे

  • चेन्नई: 100 घंटे 

किन सड़कों पर सबसे ज्यादा जाम लगता है?
उन्होंने बताया कि कई प्रमुख सड़कों पर रोजाना भारी जाम की स्थिति रहती है:

  • दिल्ली: रिंग रोड, आश्रम रोड, धौला कुआं, NH-8

  • बंगलूरू: सिल्क बोर्ड जंक्शन, आउटर रिंग रोड

  • मुंबई: अंधेरी, बांद्रा से फोर्ट रूट

  • कोलकाता: AJC बोस रोड, चौरंगी रोड

ये सड़कें शहरों के मुख्य कनेक्टिविटी रूट हैं, इसलिए यहां जाम का असर ज्यादा होता है।

क्या ट्रैफिक सिर्फ असुविधा है या बड़ा नुकसान?
चड्ढा के अनुसार, ट्रैफिक जाम सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि बड़ा नुकसान है:

  • आर्थिक नुकसान

  • उत्पादकता में गिरावट

  • ईंधन की बर्बादी

  • वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी

  • जीवन की गुणवत्ता पर असर


क्या भविष्य में स्थिति और खराब होगी?
हां, उन्होंने बताया कि पिछले साल करीब 2.5 करोड़ नए निजी वाहन रजिस्टर हुए।
इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे ट्रैफिक और गंभीर हो सकता है।

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समाधान के लिए क्या सुझाव दिया गया?
राघव चड्ढा ने 'नेशनल अर्बन डीकंजेशन मिशन' का प्रस्ताव दिया है।
इस योजना के तहत:

  • बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट

  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम

  • सुव्यवस्थित पार्किंग नीति

जैसे कदम उठाने की बात कही गई है।


कुल मिलाकर क्या समझें?
भारत के मेट्रो शहरों में ट्रैफिक जाम अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और गंभीर रूप ले सकती है। 

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