भारत में ईवी की हिस्सेदारी अभी भी कम
भारत में अभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी बहुत कम है। टू-व्हीलर सेगमेंट में सिर्फ 7 प्रतिशत, और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में महज 3 प्रतिशत। हालांकि वित्त वर्ष 23 से वित्त वर्ष 25 के बीच ईवी की बिक्री में 25 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है, लेकिन यह ग्रोथ बहुत छोटे स्तर से शुरू हुई है। इसलिए अगर ईवी बिक्री में थोड़ी गिरावट आती भी है, तो इसका समग्र असर भारत की पूरी ऑटो इंडस्ट्री पर कम ही रहेगा।
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रेयर अर्थ मटेरियल्स की जरूरत ईवी मोटर्स में ज्यादा
ईवी गाड़ियों में ज्यादातर परमानेन्ट मैगनेट सिंक्रोनस मोटर्स (PMSM) का इस्तेमाल होता है, जो रेयर अर्थ मटेरियल्स (REM) पर निर्भर होते हैं। खासतौर पर उच्च तापमान पर चुंबकीय क्षमता बनाए रखने के लिए। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ईवी में औसतन 0.8 किलोग्राम, हाइब्रिड गाड़ियों में 0.5 किलोग्राम, और ICE वाहनों में केवल 0.1 किलोग्राम REM का इस्तेमाल होता है।
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किन तत्वों पर चीन ने लगाया है बैन?
चीन ने अप्रैल में जिन सात रेयर अर्थ एलिमेंट्स के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई है, उनमें समेरियम, गैडोलिनियम, टरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेशियम, स्कैंडियम और यट्रियम शामिल हैं। ये सभी तत्व उन मैग्नेट्स को बनाने में इस्तेमाल होते हैं जो ईवी मोटर्स, एयरोस्पेस, और इंडस्ट्रियल मशीनों में काम आते हैं। चीन इस समय में दुनिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा REM प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है, जिससे वह इस पूरी सप्लाई चेन पर भारी प्रभाव डाल सकता है।
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