भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग लगातार बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 के दौरान भी देश में करोड़ों वाहनों का निर्माण किया गया। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि वित्त वर्ष 2023 के दौरान देश में कितने वाहनों का निर्माण हुआ, किस सेगमेंट के वाहनों की सबसे ज्यादा मांग रही।
कितने बने वाहन
बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वित्त वर्ष 2023 के दौरान कुल 2.7 करोड़ वाहनों का निर्माण किया गया। इन वाहनों की कीमत करीब 108 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो भारतीय मुद्रा में करीब 8.7 लाख करोड़ रुपये होते हैं।
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किस सेगमेंट में हुआ सबसे ज्यादा निर्माण
वित्त वर्ष 2023 के दौरान जिन सेगमेंट में सबसे ज्यादा निर्माण हुआ, उनमें पहले पायदान पर दो पहिया वाहन रहे। इसके बाद यात्री वाहन, कमर्शियल वाहन और फिर तीन पहिया वाहनों का योगदान रहा। प्राइमर पार्टनर्स की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हुए कुल निर्माण का 77 फीसदी दो पहिया वाहन रहे। इसके बाद 16 फीसदी यात्री वाहनों का निर्माण किया गया। तीसरे पायदान पर चार फीसदी के साथ कमर्शियल वाहन रहे और चौथे नंबर पर तीन फीसदी के साथ तीन पहिया वाहन रहे।
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दो पहिया वाहनों का कितना योगदान
रिपोर्ट के मुताबिक भारत दो पहिया वाहनों के निर्माण में वित्त वर्ष 2023 के दौरान नंबर-1 देश रहा। चीन में भी भारत के पास ही वाहनों का निर्माण किया गया। इस दौरान कुल 20 मिलियन से ज्यादा वाहनों का निर्माण हुआ जिनकी कीमत करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये रही। इन्हें बनाने में हीरो मोटोकॉर्प, होंडा स्कूटर्स, बजाज और टीवीएस प्रमुख थे।
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दुनिया में नंबर-4 पर भारत
यात्री वाहनों में भारत चीन, अमेरिका और जापान के बाद चौथे पायदान पर रहा। वित्त वर्ष 2023 के दौरान भारत में पांच लाख करोड़ रुपये के यात्री वाहनों का निर्माण हुआ। इन्हें बनाने में मारुति, ह्यूंदै, किया, टाटा, टोयोटा और महिंद्रा का योगदान रहा।
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कमर्शियल वाहनों का कितना योगदान
तीसरे पायदान पर कमर्शियल वाहनों का योगदान रहा। वित्त वर्ष 2023 के दौरान देश में 10 लाख के आस-पास कमर्शियल वाहनों का निर्माण किया गया। इनमें चार पहिया वाले कैरियर के साथ ही दो टन से ज्यादा की क्षमता के वाहन शामिल थे। टाटा, अशोक लीलैंड, आयशर और भारत बेंज जैसी कंपनियों ने करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये के वाहनों का निर्माण किया।
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तीन पहिया वाहनों का निर्माण
देश में वित्त वर्ष 2023 के दौरान 8.5 लाख तीन पहिया वाहनों का निर्माण किया गया। जिनकी कीमत करीब 17 हजार करोड़ रुपये थी। बजाज ऑटो, अतुल और ग्रीव्स जैसी कंपनियों ने कुल निर्माण के तीन फीसदी का योगदान दिया।
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