भारत में एडवांस्ड ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक को ज़मीनी हकीकत के मुताबिक परखने के लिए ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने पुणे में देश की पहली ADAS टेस्ट फैसिलिटी में संचालन शुरू कर दिया है। इस सुविधा का मकसद ऑटोमोबाइल और ऑटो-टेक कंपनियों को भारतीय ड्राइविंग परिस्थितियों में अपने ADAS फीचर्स की रीयल-वर्ल्ड टेस्टिंग और वैलिडेशन का मौका देना है।
सिमुलेशन से सर्टिफिकेशन तक का सफर कैसे पूरा होगा?
ARAI के निदेशक रेजी मैथ्यू के अनुसार, ADAS स्मार्ट सिटी ट्रैक खासतौर पर स्वदेशी ADAS और ऑटोनॉमस व्हीकल तकनीक के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। यह सुविधा खासकर उन स्टार्ट-अप्स के लिए मददगार होगी, जो इस उभरते सेक्टर में काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ARAI पहले से ही कई स्टार्ट-अप्स के साथ मिलकर काम कर रहा है और उन्हें मेंटरशिप दे रहा है। ADAS टेस्टिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियों के लिए समय स्लॉट तय करना चुनौती बनता जा रहा है, जिसके चलते फैसिलिटी के दूसरे चरण को तेज़ी से विकसित करने की जरूरत पड़ सकती है।
विदेशी ADAS तकनीक भारत में क्यों फेल हो रही थी?
अब तक विदेशों में विकसित कई ADAS तकनीकें भारतीय सड़कों के लिए अनुकूल साबित नहीं हुईं। ट्रैफिक का अनियमित व्यवहार, मिश्रित वाहन, पैदल यात्री, जानवर और सड़क संरचना, इन सबके कारण ग्राहकों का अनुभव संतोषजनक नहीं रहा।
नई फैसिलिटी के जरिये OEM अब अपने ADAS फीचर्स को भारत के असली हालात में टेस्ट कर सकेंगे।
यह ADAS टेस्ट सिटी क्या है और कितनी बड़ी है?
ADAS टेस्ट सिटी, ARAI मोबिलिटी रिसर्च सेंटर, ताकवे-तालेगांव (पुणे) में स्थित है।
यह एक पर्पज-बिल्ट स्यूडो-अर्बन एनवायरनमेंट है, जिसे भारतीय रोड नेटवर्क और ट्रैफिक कंडीशंस की हूबहू नकल पर तैयार किया गया है। यहां ADAS तकनीक की जांच सुरक्षित, नियंत्रित और दोहराए जा सकने वाले माहौल में की जा सकती है।
लॉन्च के मौके पर क्या खास दिखाया गया?
संचालन की शुरुआत के अवसर पर ARAI ने एक ADAS शो का आयोजन किया, जिसमें लाइव डेमो के जरिये विभिन्न ADAS तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसमें टेस्टिंग उपकरण, प्रोटोकॉल और सर्टिफिकेशन क्षमताएं दिखाई गईं।
किन-किन ADAS फीचर्स का प्रदर्शन हुआ?
डेमो में जिन प्रमुख फीचर्स को दिखाया गया, उनमें शामिल हैं-
भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए इसका क्या मतलब है?
इस फैसिलिटी के शुरू होने से ADAS तकनीक अब सिर्फ़ सिमुलेशन या क्लोज़्ड ट्रैक तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि भारतीय सड़कों की वास्तविक परिस्थितियों में प्रमाणित होकर बाजार में आएगी। इससे न सिर्फ सुरक्षा फीचर्स बेहतर होंगे। बल्कि ग्राहकों का भरोसा और भारतीय ऑटो टेक्नोलॉजी की आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।