जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति का लोकतांत्रिकरण करने के मामले में हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी (हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक) शायद आज के समय में हमारी सबसे बड़ी उम्मीद है। टाटा मोटर्स के प्रेसिडेंट और सीटीओ राजेंद्र पेटकर ने बताया कि यह तकनीक क्या है और इसका मोटर वाहन क्षेत्र पर क्या असर होगा और इसे अपनाने के लिए भारत कितना तैयार है।
सवाल 1. सबसे यह बताएं पहले हाइड्रोजन फ्यूल सेल क्या है?
उत्तर : सीधे शब्दों में कहें तो हाइड्रोजन फ्यूल सेल बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन की रासायनिक ऊर्जा का इस्तेमाल करता है और उप-उत्पादों के रूप में पानी और गर्मी के साथ बिजली का उत्पादन करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को जोड़ता है।
सवाल 2. यह बड़े पैमाने पर कैसे काम करता है?
उत्तर : इस तकनीक के मूल में ईंधन सेल समूह है, जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। यह इनपुट के रूप में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का उपयोग करके बिजली पैदा करता है। हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने के लिए उसे स्टोर करना पड़ता है और इसके लिए एक हाइड्रोजन टैंक की जरूरत होती है। इस ईंधन सेल स्टैक (समूह) से पैदा हुई बिजली को किसी अन्य बीईवी (बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) की तरह बैटरी में स्टोर किया जाता है।
हालांकि, शुद्ध बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) की तुलना में बैटरी आकार में बहुत छोटी है। यह परिवहन, औद्योगिक / वाणिज्यिक / आवासीय भवनों और रिवर्सेबल सिस्टम्स में दीर्घकालिक ग्रिड-आधारित ऊर्जा भंडारण सहित कई क्षेत्रों में कई तरह के इस्तेमाल के लिए ऊर्जा की आपूर्ति के लिए उपयुक्त है। भविष्य में तकनीकी सुधारों के साथ, जो वर्तमान में जारी है, कुल मिलाकर 30-35 प्रतिशत डब्ल्यूटीडब्ल्यू (वेल-टू-व्हील) दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है।
सवाल 3. क्या इस सस्टेनेबल और लागत प्रभावी टेक्नोलॉजी से रियल वर्ल्ड फायदा हैं?
उत्तर : हां! प्राथमिक ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम आधारित या नवीकरणीय) के विपरीत, हाइड्रोजन कंब्शन पर शून्य कार्बन का उत्सर्जन करता है और इसे वैश्विक परिवर्तन के लिए अगली पीढ़ी का ईंधन माना जाता है। गहराई से देखें तो हाइड्रोजन फ्यूल सेल में ऊर्जा घनत्व काफी उच्च होता है और इसे बीईवी की तुलना में बहुत तेजी से ईंधन दिया जा सकता है, और इसे लंबी दूरी के प्रयोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता ।है जैसे कि कमर्शियल व्हीकल्स (वाणिज्यिक वाहन) के लिए इस्तेमाल करने पर एक बार चार्ज करने पर 500 किमी तक की दूरी तय की जा सकती है।
सवाल 4. यह कितनी जल्दी हकीकत में बदलेगी?
उत्तर : जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं, इस तकनीक और इसे बड़े पैमाने पर अपनाए जाने ने दुनिया भर की सरकारों का ध्यान आकर्षित किया है। जापान, चीन, अमेरिका, कोरिया और यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे देश हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक को तेजी से अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
भारत भी इस मामले में योजना बनाने में बहुत दूर नहीं है। आपने समाचारों में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और भविष्य में हमारे देश को ऊर्जा-स्वतंत्र बनाने के लिए भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना के बारे में पढ़ा ही होगा। टाटा, रिलायंस और अदाणी सहित कई भारतीय समूहों ने इस मिशन का समर्थन किए जाने में रुचि दिखाई है।
आपको यह जानकर गर्व होगा कि टाटा मोटर्स इस मामले में शुरुआती प्रस्तावक थी और पहले ही हाइड्रोजन ईंधन सेल संचालित वाहनों के विकास की दिशा में काफी प्रगति कर चुकी है। पिछले कुछ समय से, एक समर्पित अनुसंधान एवं विकास केंद्र संचालन में है, जो भविष्य के लिए तैयार गतिशीलता समाधान की पेशकश के लिए तकनीकी के फायदों का लाभ उठाने की खोज कर रहा है।
इस तकनीक को समझने और अनुकूलित करने के लिए 40-50 बेहतरीन दिमागों की एक टीम को काम सौंपा गया है। हमने ऑटो एक्सपो 2012 में हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित बस के शुरुआती प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया था। इसके अलावा, टाटा मोटर्स एकमात्र भारतीय ओईएम है, जिसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन से 15 हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों के लिए अनुबंध हासिल हुआ है, जिसे अगले दो सालों के भीतर डिलीवर किया जाएगा।
सवाल 5. क्या ग्राहक वास्तव में किसी ऐसी चीज के लिए आगे आएंगे, जिसे उन्होंने केवल ऑटो शो में कॉन्सेप्ट वाहनों के रूप में देखा है, और शायद साइंस-फिक्शन फिल्में में देखा हो?
उत्तर : टाटा मोटर्स की तरफ से पेश किए गए प्रोटोटाइप फ्यूल सेल बस की रेंज 300 किलोमीटर है, जो मध्यम और भारी वाहन बेड़े के मालिकों के लिए काफी है। यह वजनदार भार ले जा सकती है और लंबी दूरी के माल परिवहन को पूरा कर सकती है। हम में से आखिर कौन ऐसे वाहनों को अपनाना नहीं चाहेगा, जो चलाने में सस्ते हों, लंबी दूरी तय कर सकते हों और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाएं। है ना?
सवाल 6. यह सब कुछ परी कथा जैसा लगता है। क्या इसमें कोई अड़चन है?
उत्तर : नहीं, वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन किसी भी नई तकनीक की तरह, इसमें भी कुछ समय लगेगा जब तक कि फ्यूल सेल ट्रक, बस और कार भारतीय सड़कों पर सामान्य घटनाक्रम न हो जाएं। तकनीकी और उत्पादों के अलावा, हरित ईंधन का समर्थन करने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की जरूरत है। नजदीकी भविष्य में इस तकनीक की मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद है। सभी नई तकनीकों की तरह, यह बीतते समय में बढ़ने के साथ और ज्यादा किफायती हो जाएगी, जो एक समेकित, इकोसिस्टम केंद्रित नजरिए को बढ़ावा देगा।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में वैश्विक स्तर पर समृद्ध, मजबूत और स्थायी प्रभाव पैदा करने की क्षमता है और हमेशा की तरह, टाटा मोटर्स गतिशीलता के भविष्य को और अधिक स्वच्छ, हरा-भरा और पर्यावरण हितैषी बनाने के लिए इस तकनीक को अपनाने के मामले में भारत का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।