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E27 Fuel: E27 पेट्रोल के लिए कितनी तैयार आपकी गाड़ी, इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से इंजन पर क्या होगा असर? जानिए

Tue, 29 Jul 2025 07:22 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को E27 फ्यूल के लिए जरूरी मानक तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यानी अब सरकार E27 फ्यूल को लाने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में बनने वाली गाड़ियां E20 फ्यूल के अनुसार बनाई जा रही हैं। ये E27 फ्यूल के लिए तैयार नहीं हैं।
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भारत में E27 फ्यूल की तैयारी शुरू - फोटो : AI
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विस्तार
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भारत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण से क्रूड ऑयल के आयात को कम करने का प्रायास कर रही है। इसके साथ ही सरकार का लक्ष्य इथेनॉल के मिश्रण को बढ़ाकर प्रदूषण में कमी लाना भी है। बता दें कि सरकार ने अप्रैल 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया है। यानी अब देश के ज्यादातर पेट्रोल पंप पर E20 फ्यूल उपलब्ध हो गया है। अब सरकार देश में E27 फ्यूल (27 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को बेचने की तैयारी कर रही है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए यह जानना जरूरी है कि इससे उनकी पुरानी या मौजूदा E20 फ्यूल पर चलने वाले वाहन पर क्या असर पड़ेगा।
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E10 से E20 फ्यूल तक का सफर
आपको बता दें कि मौजूदा समय में भारत की सड़कों पर दौड़ रही ज्यादातर गाड़ियां E10 (10% इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) और E20 फ्यूल (20% इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) पर चलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, ऐसे वाहनों की संख्या भी बहुत अधिक हैं जो इन दोनों फ्यूल पर चलने के लिए नहीं बनी हैं। इन वाहनों को इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल से चलाने पर दिक्कतें आने लगती हैं और इंजन के कंपोनेंट्स खराब होने लगते हैं।

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बता दें कि भारत में अप्रैल 2023 के पहले E20 फ्यूल पर चलने वाले वाहन लॉन्च होना शुरू हो गए थे, यानी ये वाहन E10 और E20 फ्यूल पर चल सकते हैं। इससे पहले कंपनियां E10 फ्यूल पर चलने वाली गाड़ियां बना रही थीं। जून 2022 तक भारत में बिकने वाले पेट्रोल में 10% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया था। वहीं, अप्रैल 2025 के बाद से वाहन पूरी तरह E20 कंप्लायंट इंजन के साथ आ रहे हैं।
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फ्लेक्स फ्यूल वाहन - फोटो : Amar Sharma
कितनी तैयार है आपकी गाड़ी?
इथेनॉल मिश्रित फ्यूल के अपने फायदे तो हैं लेकिन इनके नुकसान भी अनेक हैं। पुराने बीएस-3 या बीएस-4 वाहन केवल E10 फ्यूल से चलने के लिए तैयार किए गए हैं। इन वाहनों को E20 फ्यूल से चलाने पर दिक्कतें आ रही हैं और इन्हें रिपेयर करवाना सिरदर्द बन गया है। कई लोग इस कारण से अपनी पुरानी गाड़ियों को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। पुरानी गाड़ियों को E20 फ्यूल से चलाने पर इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और फ्यूल लाइन में खराबी आ रही है। इसके अलावा, गाड़ियों की मालइज में भी गिरावट आई है।

इथेनॉल से क्या है नुकसान?
इथेनॉल कोरोसिव नेचर यानी जंग लगाने वाली प्रवृत्ति का होता है। यह फ्यूल इंजन वॉल, इंजेक्टर रबर के पुर्जे समेत कई कंपोनेंट को धीरे-धीरे खराब करने लगता है। अगर वाहन E10 या E20 फ्यूल पर चलने के लिए तैयार नहीं है, तो इससे इंजन को काफी नुकसान पहुंच सकता है। यही नहीं, E27 फ्यूल के आने पर इंजन का भी E27 फ्यूल पर चलने लायक तैयार होना जरूरी है। E27 फ्यूल के लिए कंपनियों को फिर से इंजन के अहम कंपोनेंट्स में बदलाव कर उन्हें और टिकाऊ बनाना होगा।

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ग्राहकों के लिए चुनौती बन सकता है E27 फ्यूल
E10 और E20 से E20 इथेनॉल मिश्रित फ्यूल पर जाना काफी बड़ा बदलाव है। मौजूदा समय में वाहन कंपनियां गाड़ियों में E20 फ्यूल के दीर्घकालिक परिणाम का आकलन कर रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पर्याप्त परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किए बिना सरकार की योजनाएं इंजन के पुर्जों, गियर शिफ्टिंग को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसका खामियाजा अंत में ग्राहकों को भुगतना पड़ेगा। इससे उपभोक्ताओं को भारी मरम्मत बिलों का सामना करना पड़ सकता है, और वारंटी कवरेज भी नहीं मिल पाएगा।
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