गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को अधिकारियों को अहमदाबाद शहर में दोपहिया वाहन चालकों और सवारियों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने के आदेश को 15 दिनों के भीतर लागू करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने यह भी देखा कि शहर में सड़क यातायात एक ऐसा मुद्दा है जिसका ध्यान रखने की जरूरत है। और इसके प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की जरूरत है। अदालत ने नागरिक अधिकारियों को रॉन्ग साइड गाड़ी चलाने वाले लोगों पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।
अदालत ने अधिकारियों से सर्वेक्षण के जरिए ऐसे स्थानों की पहचान करने के बाद "दुर्घटना" और "उच्च दुर्घटना" वाले क्षेत्रों में बोर्ड लगाने को कहा।
हाईकोर्ट ने कहा, "हम आपको दोपहिया वाहन चालकों और सवारियों द्वारा हेलमेट पहनने की इस अनिवार्य शर्त को लागू करने के लिए 15 दिन का समय दे रहे हैं।"
खंडपीठ ने अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) द्वारा एक फ्लाईओवर के निर्माण के बारे में एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाएगी और साथ ही क्षेत्र में हरित कवर में कमी आएगी।
अदालत ने गुजरात के व्यावसायिक केंद्र में वाहनों की आवाजाही के प्रबंधन, और यातायात पुलिस विभाग में खाली पदों को भरने के पहलुओं को जोड़कर पीआईएल के दायरे का विस्तार किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि वह राष्ट्रीय राजमार्गों, विशेष रूप से अहमदाबाद शहर से होकर गुजरने वाले सरखेज-गांधीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रवेश और निकास बिंदुओं के प्रबंधन और रखरखाव को भी उसी याचिका के हिस्से के रूप में देखेगी।
मुख्य न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा, "उन क्षेत्रों की खासतौर पर पहचान करें जहां किसी विशेष समय पर भीड़भाड़ होती है। विशेष ध्यान देना ही होगा।"
उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि किसी तरह का अध्ययन हो, एक समग्र दृष्टिकोण... हम इस स्थिति से वाकिफ हैं कि यातायात एक ऐसा मुद्दा है जिसका भविष्य के लिए भी ध्यान रखा जाना चाहिए, और यह एएमसी है जिसका काम है इसे करना।"
मुख्य न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा कि सड़कों और फ्लाईओवर का निर्माण करते समय शहर में मौजूद प्रवेश और निकास बिंदुओं के मुद्दे का ध्यान रखने की जरूरत है।