स्टेज-III के दौरान क्या पाबंदियां थीं
जब ग्रैप स्टेज-3 लागू था, तब दिल्ली-एनसीआर में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाहनों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। केवल BS-4 पेट्रोल और सभी BS-6 मानकों वाले वाहन ही सड़कों पर चलने की अनुमति रखते थे। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्तर को तेजी से काबू में लाना था।
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अब क्या बदला है, किन वाहनों को मिली अनुमति
ग्रैप स्टेज-3 हटने के बाद BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाहन दोबारा सड़कों पर चल सकते हैं। हालांकि, यह छूट बिना शर्त नहीं है। सभी वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC (पीयूसी) होना अनिवार्य है। प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय रहेंगी और जिन वाहनों के पास पीयूसी नहीं होगा या जो वाहन धुआं छोड़ने वाले होंने उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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'नो PUC, नो फ्यूल' नियम अभी भी लागू
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने साफ किया है कि राजधानी में किसी भी वाहन को, चाहे वह किसी भी उत्सर्जन मानक का हो, वैध पीयूसी प्रमाणपत्र के बिना पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। यह नियम ग्रैप स्टेज से अलग है और सख्ती से लागू रहेगा।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वाहन-प्रदूषण से जुड़े अपने निर्देशों में संशोधन किया है। नए निर्देशों के अनुसार, केवल BS-4 और उससे नए वाहनों को ही व्यापक प्रतिबंधों से संरक्षण मिलता है। इसका मतलब यह है कि 15 साल या उससे पुराने BS-3 पेट्रोल वाहन दिल्ली में अब भी प्रतिबंधित रहेंगे, भले ही ग्रैप का कोई भी चरण लागू हो या नहीं।
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