बैटरी पर स्पष्ट और सुरक्षित स्थान पर अंकित होगा BPAN
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि BPAN को बैटरी पर ऐसे स्थान पर अंकित किया जाना चाहिए, जो साफ दिखाई दे और आसानी से स्कैन किया और पढ़ा जा सके। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यह पहचान संख्या समय के साथ नष्ट न हो या खराब न पड़े, ताकि बैटरी की पहचान पूरी उम्र बनी रहे।
कच्चे माल से रीसाइक्लिंग तक पूरा रिकॉर्ड
'बैटरी पैक आधार सिस्टम के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश' के अनुसार, BPAN में बैटरी से जुड़ी अहम जानकारियां दर्ज होंगी। इसमें कच्चे माल की खुदाई, निर्माण प्रक्रिया, उपयोग, सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन, रीसाइक्लिंग और अंतिम निपटान तक की पूरी डिटेल्स शामिल होगी। अगर किसी बैटरी को रीसाइक्लिंग या दोबारा उपयोग के लिए बदला जाता है और उसकी विशेषताएं बदलती हैं, तो उसे नया BPAN जारी करना होगा। चाहे वह उसी निर्माता द्वारा हो या किसी नए आयातक द्वारा।
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पारदर्शिता और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस
इस प्रस्तावित सिस्टम का उद्देश्य बैटरी इकोसिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना है। BPAN के जरिए बैटरियों के प्रदर्शन, पर्यावरणीय प्रभाव और नियामकीय अनुपालन को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। साथ ही, सेकंड-लाइफ उपयोग और कुशल रीसाइक्लिंग को भी इससे मजबूती मिलेगी।
भारत में EV बैटरियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
भारत में लिथियम-आयन बैटरियों की कुल मांग का करीब 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों से आता है। जो औद्योगिक या अन्य गैर-ऑटोमोटिव उपयोग की तुलना में कहीं अधिक है। इसी वजह से ड्राफ्ट गाइडलाइंस में सुझाव दिया गया है कि मानक तैयार करने के शुरुआती चरण में ईवी बैटरियों को प्राथमिकता दी जाए। खासकर उनके बड़े पैमाने, सुरक्षा से जुड़े पहलुओं और नियामकीय महत्व को देखते हुए।
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AIS रूट से लागू करने की सिफारिश
दिशानिर्देशों में यह भी सिफारिश की गई है कि बैटरी पैक आधार फ्रेमवर्क को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS) के जरिए आगे बढ़ाया जाए। यह प्रक्रिया ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स कमेटी (AISC) के तहत बहु-स्तरीय मानकीकरण प्रणाली के अनुसार होगी। जिससे सभी हितधारकों से परामर्श, तकनीकी सत्यापन और मौजूदा ऑटोमोटिव नियमों के साथ तालमेल सुनिश्चित किया जा सके।
सभी हितधारकों की भागीदारी पर जोर
प्रस्ताव में कहा गया है कि AISC समिति में बैटरी निर्माता, ईवी निर्माता, रीसाइक्लर, टेस्टिंग एजेंसियां और नियामकीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल किए जा सकते हैं। इससे बैटरी के पूरे जीवनचक्र से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को बेहतर तरीके से समझा और लागू किया जा सकेगा।
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ऊर्जा भंडारण की बढ़ती भूमिका
ड्राफ्ट गाइडलाइंस यह भी रेखांकित करती हैं कि डिजिटलाइजेशन और इलेक्ट्रिफिकेशन के इस दौर में एनर्जी स्टोरेज सेल्स विश्वसनीय, लचीली और कुशल बिजली आपूर्ति की नींव बन चुकी हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अलावा, बैटरियां घरेलू ऊर्जा भंडारण, औद्योगिक उपयोग और बिजली उत्पादन व वितरण जैसे कई अहम क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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