2 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई हिस्सा ऐसी संरचनाओं से बना है, तो शुल्क की गणना के लिए या तो उस संरचना की लंबाई को दस गुना करके राजमार्ग की बाकी लंबाई में जोड़ा जाएगा, या फिर राजमार्ग के कुल हिस्से की लंबाई को पांच गुना किया जाएगा। इनमें से जो भी कम होगा, उसी के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यहां 'संरचना' से मतलब है कोई स्वतंत्र पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या ऊंचा राजमार्ग।
यह भी पढ़ें - Fuel Ban: 40 वर्ष पुराने एयरक्राफ्ट उड़ रहे हैं, लेकिन पुरानी कारें बैन, दिल्ली सरकार के फैसले पर पूर्व वायुसेना पायलट ने उठाए सवाल
नए टोल शुल्क का उदाहरण
मंत्रालय ने नए टोल शुल्क को समझाने के लिए कुछ उदाहरण दिए हैं। एक उदाहरण में बताया गया है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई हिस्सा 40 किलोमीटर लंबा है और यह पूरी तरह से किसी संरचना से बना है, तो न्यूनतम लंबाई की गणना इस तरह होगी: संरचना की लंबाई को दस गुना करें, यानी 10 x 40 = 400 किलोमीटर, या फिर राजमार्ग के कुल हिस्से की लंबाई को पांच गुना करें, यानी 5 x 40 = 200 किलोमीटर। टोल शुल्क की गणना कम लंबाई, यानी 200 किलोमीटर के आधार पर होगी। इसका मतलब है कि इस मामले में टोल शुल्क सड़क की आधी लंबाई, यानी 50 फीसदी पर ही लिया जाएगा।
यह भी पढ़ें - Mahindra XEV 9e Pack Two: महिंद्रा XEV 9e पैक टू भारत में लॉन्च, जानें इस इलेक्ट्रिक एसयूवी के रेंज और फीचर्स
पुराने नियम और बदलाव की वजह
पहले के नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर किलोमीटर की संरचना के लिए सामान्य टोल शुल्क का 10 गुना शुल्क देना पड़ता था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुराना टोल गणना का तरीका ऐसी संरचनाओं के निर्माण की ज्यादा लागत को पूरा करने के लिए बनाया गया था। लेकिन अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की नई अधिसूचना ने फ्लाईओवर, अंडरपास और सुरंग जैसे हिस्सों के लिए टोल शुल्क को 50 फीसदी तक कम कर दिया है।
यह भी पढ़ें - Bharat Mobility Global Expo 2027: भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2027 की तारीख तय, जानें आयोजन का पूरा शेड्यूल
यह भी पढ़ें - Nissan Magnite CNG: अब छह नए राज्यों में भी मिलेगी निसान मैग्नाइट सीएनजी, डीलरशिप पर लगेगी रेट्रोफिटेड किट