पार्किंग में गाड़ी खड़ी करना हमेशा जोखिम भरा रहता है। कई बार जब मालिक वापस लौटते हैं, तो उन्हें अपनी कार किसी दूसरे की लापरवाही, साइकिल या आवारा ट्रॉलियों की वजह से क्षतिग्रस्त मिलती है। इसके बाद बहस, डैशकैम फुटेज की जांच और इंश्योरेंस के कागजी काम का लंबा सिलसिला शुरू होता है। लेकिन अमेरिकी कार निर्माता कंपनी फोर्ड (Ford) ने एक ऐसा समाधान निकाला है जिससे आपकी कार खुद ही खतरे को भांपकर वहां से हट जाएगी।
फोर्ड ने 5 मई को एक नया पेटेंट प्रकाशित किया है (जो मूल रूप से तीन साल पहले फाइल किया गया था)। इसका विचार काफी सरल लेकिन प्रभावी है:
यदि पार्किंग में खड़ी कार को पता चलता है कि कोई दूसरा वाहन या वस्तु उससे टकराने वाली है, तो वह खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाएगी।
यह सिस्टम न केवल खतरे का पता लगाएगा, बल्कि टकराव से बचने के लिए कार को स्वचालित रूप से (ऑटोमैटिक) मूव करेगा।
खड़ी कार को अपने आसपास की निगरानी के लिए कई तरह के एडवांस्ड उपकरणों का सहारा लेना होगा:
सेंसर नेटवर्क: कार के चारों ओर लगे कैमरा, रडार, LiDAR और अल्ट्रासोनिक पार्किंग सेंसर आसपास की लाइव इमेज तैयार करेंगे।
खतरे का आकलन: सिस्टम चलती हुई वस्तुओं की गति, स्थान और दिशा (ट्रैजेक्ट्री) के आधार पर उन्हें 'खतरे के स्तर' में बांटेगा।
सटीक गणना: फोर्ड का यह सिस्टम आखिरी सेकंड का इंतजार करने के बजाय आने वाली वस्तु के रास्ते का पहले ही अनुमान लगा लेगा और संभावित प्रतिक्रियाओं की गणना करेगा।
यदि सिस्टम को लगता है कि टक्कर होने ही वाली है, तो वह इन चरणों का पालन करेगा:
चेतावनी: सबसे पहले, कार फ्लैशिंग लाइट और हॉर्न के जरिए आने वाले ड्राइवर को चेतावनी देगी।
बचाव की चाल: यदि चेतावनी काम नहीं करती, तो कार खुद स्टीयर कर सकती है, आगे बढ़ सकती है या पीछे हटकर रास्ता बदल सकती है।
आसपास का ध्यान: कार बिना सोचे-समझे कहीं भी नहीं भागेगी। यदि आगे बढ़ने पर किसी दीवार या पैदल यात्री से टकराने का खतरा होगा, तो कार वहीं खड़ी रहेगी। वह तभी हिलेगी जब पास में खाली जगह उपलब्ध होगी।
डेटा लॉगिंग: यदि टक्कर को टालना नामुमकिन हो, तो सिस्टम घटना को रिकॉर्ड और लॉग करेगा ताकि बाद में पहचान और जांच में मदद मिल सके।
यह सुनने में जितना काल्पनिक लगता है, उससे कहीं अधिक वास्तविक है:
मौजूदा तकनीक: आज की कारों में पहले से ही 360-डिग्री कैमरा, सेल्फ-पार्किंग, इलेक्ट्रिक स्टीयरिंग और रडार क्रूज कंट्रोल जैसे फीचर्स मौजूद हैं। फोर्ड इन्हीं का इस्तेमाल इस नए काम के लिए करना चाहता है।
सरल एआई: पूर्ण स्वायत्त ड्राइविंग (ऑटोनॉमस ड्राइविंग) की तुलना में, कार को केवल खतरे को पहचानने और थोड़ी दूर हटने के लिए "इंटेलिजेंस" की जरूरत है।
चुनौतियां: हालांकि कागज पर यह संभव दिखता है, लेकिन असली चुनौती रेगुलेटर्स की अनुमति हासिल करना है। बिना मानवीय नियंत्रण के गाड़ी का खुद हिलना और इस दौरान अन्य बाधाओं या पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ा सवाल है।