परियोजना का स्वरूप और निर्माण लागत क्या है?
एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) की 444वीं बैठक (23-24 अप्रैल) में इस प्रोजेक्ट के विवरण पर चर्चा की गई:
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लेन की संख्या: यह चार से छह लेन का एक्सप्रेसवे होगा।
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कुल लागत: इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण पर 9,250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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वन भूमि का उपयोग: पश्चिम बंगाल में इसके लिए 103 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित और संरक्षित वन भूमि को डायवर्ट करने की आवश्यकता होगी।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह एक्सप्रेसवे एक टाइगर लैंडस्केप से होकर गुजरेगा, जिसे देखते हुए समिति ने कड़े निर्देश दिए हैं:
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पेड़ों की कटाई: इस प्रोजेक्ट के लिए वन क्षेत्रों में 10,000 और गैर-वन क्षेत्रों में 40,000 पेड़ों को काटने की आवश्यकता होगी।
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वन्यजीव प्रजातियां: इस क्षेत्र में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत 17 'अनुसूची-I' प्रजातियां रहती हैं, जिनमें तेंदुआ, भारतीय हाथी, सांभर हिरण, धारीदार लकड़बग्घा, भारतीय लोमड़ी और सियार शामिल हैं।
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हाथी गलियारा: जंगल महल एलीफेंट कॉरिडोर प्रोजेक्ट से 7.75 किमी दक्षिण में स्थित है, लेकिन वर्तमान हाईवे अलाइनमेंट को हाथी गलियारे कई जगहों पर पार करते हैं।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
एनएचएआई ने जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष बुनियादी ढांचे का प्रस्ताव दिया है:
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अंडरपास का निर्माण: वन्यजीवों और हाथियों के लिए 20 अंडरपास बनाए जाएंगे।
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ऊंचाई और विस्तार: EAC ने निर्देश दिया है कि इन अंडरपास की ऊंचाई 8 से 10 मीटर होनी चाहिए।
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DFO की सिफारिशें: समिति ने स्पष्ट किया है कि अंडरपास का स्पैन (चौड़ाई) डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) की सिफारिशों के अनुसार होना चाहिए, जो 300 मीटर तक हो सकता है। किसी भी अंडरपास की चौड़ाई DFO द्वारा निर्धारित सीमा से कम नहीं होनी चाहिए।
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे न केवल उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच की दूरी कम करेगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी गति देगा। हालांकि, पर्यावरण और वन्यजीवों के हितों को सुरक्षित रखना इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता बनी हुई है।