फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

NHAI: वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के 235 किमी लंबे हिस्से को मिली मंजूरी, बंगाल के इन जिलों को मिलेगा फायदा

Thu, 07 May 2026 10:31 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वाराणसी और कोलकाता को जोड़ने वाला यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, एक बाघ क्षेत्र से भी होकर गुजरेगा। यह प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) परियोजना का एक हिस्सा। जिसमें चार से छह लेन वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण शामिल है। और इस पर 9,250 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
विज्ञापन
Expressway (For Reference Only) - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पर्यावरण मंत्रालय के एक विशेषज्ञ पैनल ने वाराणसी और कोलकाता को जोड़ने वाले 235 किलोमीटर लंबे 'ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे' के लिए पर्यावरणीय मंजूरी (EC) देने की सिफारिश की है। 9,250 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पश्चिम बंगाल के कई महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगी।

यह एक्सप्रेसवे बंगाल के किन जिलों से होकर गुजरेगा?

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) की इस परियोजना का उद्देश्य कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। बंगाल में इसका मार्ग इन जिलों से होकर तय किया गया है:

  • पुरुलिया 

  • बांकुरा 

  • पश्चिम मेदिनीपुर 

  • हुगली 

  • हावड़ा 

विज्ञापन

परियोजना का स्वरूप और निर्माण लागत क्या है?

एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) की 444वीं बैठक (23-24 अप्रैल) में इस प्रोजेक्ट के विवरण पर चर्चा की गई:

  • लेन की संख्या: यह चार से छह लेन का एक्सप्रेसवे होगा।

  • कुल लागत: इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण पर 9,250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

  • वन भूमि का उपयोग: पश्चिम बंगाल में इसके लिए 103 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित और संरक्षित वन भूमि को डायवर्ट करने की आवश्यकता होगी।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

यह एक्सप्रेसवे एक टाइगर लैंडस्केप से होकर गुजरेगा, जिसे देखते हुए समिति ने कड़े निर्देश दिए हैं:

  • पेड़ों की कटाई: इस प्रोजेक्ट के लिए वन क्षेत्रों में 10,000 और गैर-वन क्षेत्रों में 40,000 पेड़ों को काटने की आवश्यकता होगी।

  • वन्यजीव प्रजातियां: इस क्षेत्र में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत 17 'अनुसूची-I' प्रजातियां रहती हैं, जिनमें तेंदुआ, भारतीय हाथी, सांभर हिरण, धारीदार लकड़बग्घा, भारतीय लोमड़ी और सियार शामिल हैं।

  • हाथी गलियारा: जंगल महल एलीफेंट कॉरिडोर प्रोजेक्ट से 7.75 किमी दक्षिण में स्थित है, लेकिन वर्तमान हाईवे अलाइनमेंट को हाथी गलियारे कई जगहों पर पार करते हैं।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

एनएचएआई ने जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष बुनियादी ढांचे का प्रस्ताव दिया है:

  • अंडरपास का निर्माण: वन्यजीवों और हाथियों के लिए 20 अंडरपास बनाए जाएंगे।

  • ऊंचाई और विस्तार: EAC ने निर्देश दिया है कि इन अंडरपास की ऊंचाई 8 से 10 मीटर होनी चाहिए।

  • DFO की सिफारिशें: समिति ने स्पष्ट किया है कि अंडरपास का स्पैन (चौड़ाई) डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) की सिफारिशों के अनुसार होना चाहिए, जो 300 मीटर तक हो सकता है। किसी भी अंडरपास की चौड़ाई DFO द्वारा निर्धारित सीमा से कम नहीं होनी चाहिए।

 

विज्ञापन

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे न केवल उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच की दूरी कम करेगा, बल्कि औद्योगिक विकास को भी गति देगा। हालांकि, पर्यावरण और वन्यजीवों के हितों को सुरक्षित रखना इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता बनी हुई है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें