वायरस के चलते जारी लॉकडाउन के कारण ऑटो इंडस्ट्री की हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है। इंडस्ट्री के लोग मौजूदा स्थिति को देखकर आगे के दिनों की चिंता कर रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाले दिन भी ऑटो इंडस्ट्री के लिए ठीक नहीं रहने वाले हैं। बता दें कि ऐसा इतिहास में पहली बार होगा जब ऑटो इंडस्ट्री में अप्रैल महीने में कोई बिक्री नहीं होगी। यही नहीं कंपनियों को आगे भी डर सता रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में भी जरूरी नहीं है कि हालात सामान्य हों। ऑटो कंपनियों का कहना है कि प्लांट बद करना आसान है लेकिन उन्हें दोबारा से शुरू करना बहुत मुश्किल है। कंपनियों को अप्रैल के बाद यानी मई में भी सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
मालूम हो कि पूरी ऑटो इंडस्ट्री चार करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देती है। जबकि सरकार को कुल टैक्स का 15 प्रतिशत भी इसी इंडस्ट्री से ही मिलता है। वहीं देश की जीडीपी में भी 8 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी इसी सेक्टर की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक टीवीएस मोटर्स के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को जापान के जस्ट इन टाइम (JIT) के कामकाज के तरीके को अपनाने की जरूरत है क्योंकि इससे भविष्य के लिए जोखिम कम हो जाता है। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हमारे स्पलायर्स 20 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हों। ताकि सप्लाई चेन में रुकावट न आए।
श्रीनिवासन ने कहा कि मई में भी व्यापार धीमा ही रहने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रॉडक्शन को जारी रखने के लिए तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में वेंडर्स का खुलना जरूरी है। वहीं मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने कहा कि अप्रैल के बाद अब मई में भी सुधार की संभावन कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक ऑटोमोबाइल कंपनियों के संगठन SIAM के प्रेजिडेंट राजन वढेरा ने कहा कि हमें मोटरसाइकिल, थ्री व्हीलर्स और स्मॉल कमर्शल वीकल्स बेचने की शुरुआत के लिए कस्बों या ग्रामीण क्षेत्र में डीलर्स को खोलना चाहिए। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका का मानना है कि अगर इंडस्ट्री लगभग तीन महीने में भी शुरू हो जाती है तो यह भी एक उपलब्घि होगी।