खराब सड़क और ट्रैफिक जाम पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
एनएचएआई ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश के विनोद चंद्रन की पीठ ने अपील खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा, "आप लोगों से टोल लेते हो लेकिन सुविधा नहीं देते... सर्विस रोड भी ठीक से व्यवस्थित नहीं है।"
जस्टिस चंद्रन ने एनएचएआई से कहा, "अपील करके वक्त बर्बाद करने के बजाय कुछ काम करें।"
अदालत ने यह भी कहा कि यहां तक कि एंबुलेंस को भी इस जाम वाले हिस्से से निकलने में दिक्कत होती है।
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जनता और NHAI के बीच भरोसे पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि जनता और एनएचएआई के बीच का रिश्ता "पब्लिक ट्रस्ट" पर टिका है, और अगर सुचारू यातायात नहीं मिलता तो यह भरोसा टूट जाता है।
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NHAI की दलील और अदालत का रुख
एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले ने रियायतकर्ता, गुरुवायूर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को एनएचएआई से नुकसान की वसूली करने की "गलत" अनुमति दे दी। लेकिन अदालत टस से मस नहीं हुई और एनएचएआई से उसकी कमियों के बारे में सवाल करती रही।
यह महसूस करते हुए कि अदालत अपील पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है, मेहता ने कार्य स्थानों को दर्शाने वाले मानचित्र प्रस्तुत करने के लिए स्थगन की मांग की, जिस पर सीजेआई ने कहा, "आप बर्खास्तगी को स्थगित करना चाहते हैं?"
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अगली सुनवाई सोमवार को
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एनएचएआई और रियायतग्राही के बीच विवादों का समाधान मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है। इस मामले को, रियायतग्राही की अलग याचिका के साथ, सोमवार को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया था।
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