कुल मिलाकर, इन निकासों ने उद्योग में बड़ी गड़बड़ी पैदा की। इसे ध्यान में रखते हुए, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) (फाडा) ने ऑटो OEM (ओरिजिनल इक्यूप्मेंट मैन्युफेक्चरर्स) (मूल उपकरण निर्माता) को देश से अचानक बाहर निकलने से रोकने के लिए विधायी सुरक्षा मांगी है। FADA ने कहा है कि इस तरह का कानून डीलरों और उन रिटेल आउटलेट्स में काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगा।
पीटीआई ने बताया, ऑटोमोबाइल डीलरों के निकाय द्वारा आयोजित छठे ऑटो रिटेल कॉन्क्लेव में बोलते हुए, नव नियुक्त FADA अध्यक्ष सी एस विग्नेश्वर ने भी भारतीय सरकार से राज्य सरकारों को केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए सख्त निर्देश जारी करने के लिए कहा।
भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी को संबोधित करते हुए, FADA अध्यक्ष ने कहा कि उद्योग को डीलरों के हितों की रक्षा में सरकार के समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमें आपके समर्थन की आवश्यकता है, और इसलिए हम विधायी सुरक्षा का अनुरोध करते हैं ताकि OEM को देश से अचानक बाहर निकलने से रोका जा सके। जिससे डीलर, कर्मचारी और ग्राहक फंस जाते हैं।"
विग्नेश्वर ने कहा कि अगले दो वर्षों के लिए FADA की सर्वोच्च नीति प्राथमिकताएं रिटेल प्रोटेक्शन एक्ट और मॉडल डीलर एग्रीमेंट (एमडीए) होंगी। उन्होंने कहा, "ये सिर्फ विधायी मामले नहीं हैं, वे देश भर में डीलरशिप के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मौलिक हैं।"
2017 से पिछले सात वर्षों में, कुछ प्रमुख वैश्विक ऑटो निर्माताओं जैसे फोर्ड, जनरल मोटर्स और हार्ले डेविडसन ने भारतीय बाजार में अपनी बिक्री बंद कर दी है। FADA ने दावा किया है कि इन कंपनियों के बंद होने से डीलरशिप पर काम करने वाले हजारों कर्मचारियों की छंटनी हुई है।
इस बीच, FADA अध्यक्ष ने ऑटो डीलर वर्कशॉर्प को ऑरेंज जोन से ग्रीन जोन में पुनर्वर्गीकृत करने में सरकार से सहयोग मांगा। उन्होंने कहा, "आज, हमारी कार्यशालाएँ शून्य डिस्चार्ज का अभ्यास करती हैं, पानी को रीसाइकिल करती हैं, और सौर ऊर्जा पर अधिक निर्भर करती हैं, जिससे वे पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ बन जाती हैं।"