ईयू ने लगाया 495 मिलियन डॉलर का भारी जुर्माना
ईयू ने यूरोप में काम कर रही 15 बड़ी कार कंपनियों और यूरोपीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACEA) पर 495 मिलियन डॉलर (लगभग 4,237.62 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना 'एंड-ऑफ-लाइफ' (ईएलवी) वाहन रीसाइक्लिंग से जुड़े एक दीर्घकालिक कार्टेल के संचालन को लेकर लगाया गया है। सभी कंपनियों ने इस गड़बड़ी में शामिल होने की बात स्वीकार की और केस निपटाने पर सहमति जताई।
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मर्सिडीज-बेंज ने खोला कार्टेल का राज
यूरोपीय आयोग की जांच में खुलासा हुआ कि 15 प्रमुख कार निर्माता कंपनियां और ACEA, 15 वर्षों से प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों और ईएलवी वाहनों के रीसाइक्लिंग से जुड़े अनैतिक कार्यों में शामिल थीं। ईएलवी (एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल) ऐसे वाहन होते हैं, जो अपनी उम्र, क्षति या ज्यादा इस्तेमाल के कारण सड़क पर चलने योग्य नहीं रहते। इन्हें कबाड़ में दोबारा उपयोग और रीसाइकल (पुनर्चक्रण) के लिए संसाधित किया जाता है।
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इस घोटाले में शामिल प्रमुख कंपनियों में Mercedes-Benz (मर्सिडीज-बेंज) भी थी, जिसने सबसे पहले इस कार्टेल का खुलासा किया और इसके बदले में उसे 35 मिलियन पाउंड (लगभग 323.34 करोड़ रुपये) के जुर्माने से छूट मिल गई। Stellantis (स्टेलेंटिस) (जिसमें Opel भी शामिल है), Mitsubishi (मित्सुबिशी) और Ford (फोर्ड) जैसी अन्य कंपनियों को भी यूरोपीय आयोग के साथ सहयोग करने पर कुछ छूट मिली।
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Mitsubishi Pajero Sport
- फोटो : Mitsubishi
जांच के निष्कर्ष
यूरोपीय आयोग की जांच में दो प्रमुख मुद्दों पर कंपनियों की मिलीभगत उजागर हुई:
- कार निर्माताओं ने ईएलवी वाहनों की प्रोसेसिंग के लिए डिस्मेंटलर्स (गाड़ियों को तोड़ने वाले) को भुगतान नहीं करने का फैसला किया। कंपनियों का दावा था कि ईएलवी रीसाइक्लिंग पहले से ही एक लाभकारी व्यवसाय है, इसलिए उन्होंने "जीरो-ट्रीटमेंट-कॉस्ट" रणनीति अपनाई। साथ ही, इन कंपनियों ने अपने व्यक्तिगत समझौतों और रणनीतियों को लेकर आपसी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया।
- कंपनियों ने ईएलवी वाहनों के रीसाइकिलिंग और पुन: उपयोग की सीमा को उजागर नहीं करने का फैसला किया। इससे उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं मिल पाई कि नई गाड़ियों में कितना रीसाइकिल मटेरियल इस्तेमाल किया गया है। इस रणनीति का मकसद था कि उपभोक्ता कार खरीदते समय पर्यावरणीय कारकों को कम महत्व दें, जिससे कंपनियों को कानूनी पर्यावरणीय मानकों से ऊपर जाने का दबाव न पड़े।
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