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E20 Fuel Myths vs Reality: एक लीटर इथेनॉल में लगता है 10,000 लीटर पानी? सरकार ने बताया दावे का सच!

Sat, 04 Jul 2026 12:08 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे

सार

E20 Fuel Myths vs Reality: भारत में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ने के साथ सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने, माइलेज घटने, वाहन की वॉरंटी खत्म होने और इथेनॉल उत्पादन में भारी पानी की खपत जैसे कई दावे वायरल हो रहे हैं। सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े संगठनों ने इन दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार के मुताबिक, E20 को लेकर फैलाए जा रहे ज्यादातर दावे भ्रामक या तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। जानिए पानी की खपत, इंजन सेफ्टी, वॉरंटी, टेस्टिंग और पर्यावरण से जुड़े वायरल दावों की सच्चाई।
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सरकार ने बताया वायरल दावों का पूरा सच - फोटो : एआई
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विस्तार
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भारत में इन दिनों E20 पेट्रोल का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पेट्रोल पंप पर E20 ईंधन देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर कई भ्रामक दावे वायरल हो रहे हैं। जैसे इंजन खराब होना, माइलेज कम होना या इंश्योरेंस कवर न मिलना।

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अगर आप भी अपनी गाड़ी को लेकर चिंतित हैं, तो परेशान न हों। सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों ने इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। आइए, समझते हैं E20 पेट्रोल से जुड़े वायरल दावों का पूरा सच क्या है।


पानी की बर्बादी और खेती से जुड़ी अफवाह

  • वायरल दावा: सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने के लिए 10,000 लीटर पानी बर्बाद होता है।
  • सच्चाई: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह दावा बिल्कुल गलत है। लोग धान जैसी फसलों में लगने वाले पानी को एथेनॉल से जोड़कर भ्रम फैला रहे हैं। असलियत में, मॉडर्न प्लांट के अंदर 1 लीटर एथेनॉल बनाने में सिर्फ 3 से 5 लीटर इंडस्ट्रियल पानी लगता है। इस पानी को भी 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' तकनीक से रीसाइकल कर लिया जाता है, यानी पानी की कोई बर्बादी नहीं होती।

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क्या E20 एक नया और बिना टेस्टिंग वाला प्रयोग है?

  • वायरल दावा: कुछ लोगों का मानना है कि E20 एक नया एक्सपेरिमेंट है, जिससे गाड़ियों को नुकसान हो सकता है।
  • सच्चाई: ट्रांसपोर्ट ईंधन के रूप में एथेनॉल का इस्तेमाल 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। अमेरिका और ब्राजील जैसे देश कई वर्षों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में भी ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) और अन्य तकनीकी संस्थानों ने E20 का लाखों किलोमीटर तक टेस्ट किया है। टेस्टिंग में यह पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है और इससे गाड़ी की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

 


इंजन की वॉरंटी खत्म होने और कीड़े लगने का डर

  • वायरल दावा: E20 के इस्तेमाल से कार/बाइक की वॉरंटी खत्म हो जाएगी और ईंधन टैंक के ढक्कन पर मीठे की वजह से कीड़े लग जाएंगे।
  • सच्चाई: वाहन निर्माता कंपनियों की संस्था SIAM ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल डालने से गाड़ी की वॉरंटी पर कोई असर नहीं पड़ता। वहीं, BPCL के अनुसार, ईंधन वाले एथेनॉल में कोई चीनी नहीं बचती। इसमें ऐसे केमिकल्स होते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं। इसलिए, कीड़े लगने वाली बात पूरी तरह से काल्पनिक है।

 


पानी अलग होने और कोर्ट केस का भ्रम

  • वायरल दावा: सोशल मीडिया पर कुछ फर्जी वीडियो में पेट्रोल और एथेनॉल से पानी अलग होते दिखाया जा रहा है। साथ ही कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर मामला चल रहा है।
  • सच्चाई: सरकार ने पेट्रोल में पानी मिलने वाले वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया है। आधुनिक गाड़ियों के इंजन पानी से बचाव के लिए पहले से ही सुरक्षित बनाए जाते हैं। रही बात कोर्ट केस की, तो अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने साफ किया है कि अदालत में चल रहा मामला केवल कंपनियों के ठेके से जुड़ा था, न कि पेट्रोल की क्वालिटी से।

 


E20 पेट्रोल से देश और आपको क्या फायदे हैं?

एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम देश के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:

  • अर्थव्यवस्था को मजबूती: 2014-15 से मई 2026 तक भारत ने कच्चा तेल आयात न करके लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की भारी विदेशी मुद्रा बचाई है।
  • किसानों की आमदनी बढ़ी: इस कार्यक्रम के जरिए देश के किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का सीधा भुगतान किया गया है।
  • पर्यावरण सुरक्षा: E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार्बन प्रदूषण में भारी कमी आती है, जो हमारे पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा है।

E20 पेट्रोल पूरी तरह से सुरक्षित है और आधुनिक इंजनों के हिसाब से टेस्ट किया गया है। सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें और बेफिक्र होकर अपनी गाड़ी में इसका इस्तेमाल करें। यह न केवल आपकी गाड़ी के लिए सुरक्षित है, बल्कि देश की इकॉनमी और पर्यावरण के लिए भी वरदान है।

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