सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी चलती गाड़ी के सामने कूदकर उसे रोकता है और फिर चाबी छीनने की कोशिश करता है। इस वीडियो ने भारतीय ड्राइवरों के बीच अपने अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि कानून पुलिस को क्या करने की अनुमति देता है और क्या नहीं।
अक्सर देखा गया है कि पुलिसकर्मी अचानक ट्रैफिक के बीच आ जाते हैं या इंजन बंद कर चाबी निकाल लेते हैं। कानून की स्थिति इस प्रकार है:
दस्तावेज मांगने का अधिकार: मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 130 के तहत, वर्दी में मौजूद अधिकारी आपसे ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, इंश्योरेंस और पीयूसी जैसे दस्तावेज मांग सकता है।
चाबी छीनने का प्रावधान: कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी कानून में नियमित जांच के दौरान जबरन चाबी छीनने का कोई प्रावधान नहीं है।
वाहन जब्त करना: धारा 207 के तहत केवल गंभीर उल्लंघन (जैसे बिना लाइसेंस या बिना रजिस्ट्रेशन) के मामले में ही वाहन जब्त किया जा सकता है। इसके लिए भी 'सीजर मेमो' (पंचनामा) जैसे उचित कानूनी कागजी कार्रवाई जरूरी है।
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी का चलती गाड़ी के सामने कूदना एक गंभीर मुद्दा है:
जान का जोखिम: यह हरकत अधिकारी और सड़क उपयोगकर्ताओं, दोनों की जान जोखिम में डालती है।
अधिकारों का उल्लंघन: विशेषज्ञ इसे अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन और सत्ता का दुरुपयोग मान सकते हैं।
अदालती निर्देश: अदालतों ने भी समय-समय पर पुलिस को निर्देश दिया है कि वे चाबी छीनने या नकद भुगतान के लिए मजबूर करने जैसे अनधिकृत तरीकों से वाहन चालकों को परेशान न करें।
सड़कों पर अक्सर विवाद की स्थिति बनने के पीछे कई कारण हैं:
जागरूकता की कमी: कनिष्ठ अधिकारियों को अपनी शक्तियों की सीमा का पता नहीं होता। वहीं नागरिक भी अपने अधिकारों से अनजान होते हैं।
दबाव: ट्रैफिक विभागों पर चालान के लक्ष्यों (टारगेट) को पूरा करने का भारी दबाव होता है।
डर का माहौल: कई बार चालक डर के मारे बिना सवाल किए चाबी सौंप देते हैं। जिससे इस तरह की प्रथाओं को बढ़ावा मिलता है।
कानूनी विशेषज्ञों और सड़क सुरक्षा जानकारों ने कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:
शांत रहें: जब इशारा मिले, तो वाहन को सुरक्षित रूप से किनारे लगाएं और बहस न करें।
कारण पूछें: आपके पास यह जानने का अधिकार है कि आपको क्यों रोका गया है। शालीनता से कारण पूछें।
डिजिटल दस्तावेज दिखाएं: आप mParivahan या DigiLocker जैसे एप पर डिजिटल दस्तावेज दिखा सकते हैं, जो मान्य हैं।
रिकॉर्डिंग करें: आप बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकते हैं (ड्यूटी में बाधा डाले बिना), यह दोनों पक्षों की सुरक्षा के लिए अच्छा है।
विरोध का तरीका: यदि चाबी छीनी जाती है या बदसलूकी होती है, तो शारीरिक रूप से न उलझें। अधिकारी का नाम (नेम टैग), बैच नंबर और पुलिस वाहन का नंबर नोट कर लें।
शिकायत दर्ज करें: जुर्माने का भुगतान केवल आधिकारिक चैनलों के माध्यम से करें। दुर्व्यवहार की स्थिति में ट्रैफिक कंट्रोल रूम में शिकायत करें या आरटीआई (RTI) के जरिए जानकारी मांगें।