दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को 350 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनके शामिल होने के साथ, दिल्ली में अब 1,650 इलेक्ट्रिक बसें हो गई हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह संख्या भारत के सभी शहरों में सबसे ज्यादा है और वैश्विक स्तर पर दिल्ली तीसरे स्थान पर है।
इन 350 इलेक्ट्रिक बसों को पहले ही सेवा में शामिल कर लिया गया है। उनमें से 300 क्लस्टर बस बेड़े में शामिल की गई हैं जबकि बाकी दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े के हिस्से के रूप में चल रही हैं। इन इलेक्ट्रिक बसों का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा किया गया है। ये लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें एक बार चार्ज करने पर लगभग 250 किमी की दूरी तय करती हैं। सभी ई-बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीपीएस, सीसीटीवी, पैनिक बटन सहित अन्य सुरक्षा फीचर्स उपलब्ध हैं।
Electric Bus
- फोटो : Twitter/@ArvindKejriwal
केंद्र सरकार ने FAME-II योजना के तहत इन सभी इलेक्ट्रिक बसों को दिल्ली को प्रदान किया है। हरी झंडी दिखाने के समारोह में, केजरीवाल ने कहा, "इनके साथ, दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या 1,650 हो गई है। वर्तमान में दिल्ली में भारत के सभी शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या सबसे ज्यादा है। वैश्विक स्तर पर, इलेक्ट्रिक बसों की संख्या में दिल्ली तीसरे स्थान पर है।"
इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली सरकार की सार्वजनिक परिवहन में शून्य उत्सर्जन हासिल करने की योजनाओं का हिस्सा हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा, "ये इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हमें विश्वास है कि इस तरह की पहलें दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करेंगी। हमारी कोशिश है कि बस बेड़े में सीएनजी बसों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों से बदल दिया जाए।"
2022 से, दिल्ली में 1,300 इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। परिवहन मंत्रालय के अनुसार, इन इलेक्ट्रिक बसों ने पहले ही 5.8 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय कर ली है। जिससे 47,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है। इलेक्ट्रिक बसें अब दिल्ली की 7,582 चल रही सार्वजनिक बसों के 10 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान करती हैं। सरकार की योजना है कि जल्द ही शहर के बस बेड़े का 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसों से मिलकर बने।