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इस नीले रंग की WagonR में बैठ कर पहली बार पर्चा भरने गए थे केजरीवाल, आज है इस हालत में

Tue, 21 Jan 2020 07:57 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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kejriwal car
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2013 में दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के बहुत से लोग उस नीले रंग की वैगन-आर कार से परिचित हो गए थे। ये वही कार थी, जिसमें बैठकर अरविंद केजरीवाल ने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। जब उन्होंने अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ा, तो वे पूर्व चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल एल. रामदास के साथ नीले रंग की वैगन-आर कार में बैठकर जाम नगर स्थित निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में पहुंचे थे।

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जब वे 49 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने इसी कार में आना-जाना शुरू किया। बाद में यह कार दिल्ली सचिवालय से चोरी हो गई और मिल भी गई। जिस व्यक्ति ने इसे केजरीवाल को दान के तौर पर दिया था, उसने इसे वापस देने की बात कही। हालांकि बाद में उन्होंने अपना फैसला बदल लिया।

आप वालंटियर आज भी इस कार को शुभ मानते हैं। वे इसे अपने पास ही रखे हुए हैं।
 

अन्ना आंदोलन के बाद जब अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने आम आदमी पार्टी का गठन किया, तो उस वक्त बहुत कुछ दान पर आधारित था। एक राजनीतिक पार्टी को जिन संसाधनों की आवश्यकता होती है, वह सब आम आदमी पार्टी को आम लोगों से ही मिला था। कुछ बड़े लोगों ने भी मदद की।

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एनआरआई समुदाय भी मदद के लिए आगे आया। अमेरिका में रहने वाले आप वालंटियर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर कुंदन शर्मा ने 2013 में ये कार केजरीवाल को दान दी थी। केजरीवाल ने इस कार में सवार होकर अपने जीवन का पहला नामांकन दाखिल किया। उसके बाद दिल्ली की 70 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के लिए भी अरविंद ने इसी कार का इस्तेमाल किया।

2014 के लोकसभा चुनाव में भी अरविंद इसी कार में सवार होकर चुनाव प्रचार के लिए निकले। दिल्ली ही नहीं, बल्कि एनसीआर के क्षेत्रों में भी वे इसी कार में बैठकर गए। उसके बाद यह कार रोहतक लोकसभा क्षेत्र से आप प्रत्याशी नवीन जयहिंद को दे दी गई। 2015 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को प्रचंड जीत मिली।

उन्होंने यह कार अपनी सहयोगी वंदना को दे दी। कुछ दिन बाद जब अरविंद केजरीवाल के सहयोगी जैसे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, आनंद कुमार व अजीत झा आदि नेताओं को आप से बाहर किया गया, तो बहुत से वालंटियर्स को केजरीवाल का यह कदम अच्छा नहीं लगा।

इसी के चलते कई दूसरे लोगों ने आप को अलविदा कह दिया। उसी दौरान कुंदन शर्मा ने केजरीवाल से अपनी वैगन-आर कार लौटाने के लिए कहा। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि अब केजरीवाल ही इस कार को रख लें।

दिल्ली सचिवालय से हुई चोरी

2017 में यह कार दिल्ली सचिवालय की पार्किंग में खड़ी थी। अक्तूबर माह में कोई इसे वहां से चुरा ले गया। कुछ ही देर में नीले रंग की वैगन-आर कार चोरी होने की खबर मीडिया में फैल गई। केजरीवाल ने इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस और एलजी पर निशाना साधा। हालांकि दो तीन दिन बाद यह कार गाजियाबाद से बरामद हो गई।

उसके कुछ दिन बाद तक भी इस कार का इस्तेमाल किया गया। बाद में यह कार दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल के आवास पर देखी गई। हालांकि सड़क पर अब यह कार नहीं दिख रही है। आप के वालंटियर अभी तक इस गाड़ी को भाग्यशाली और शुभ मानते हैं।

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