चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (CPCL) ने आईआईटी-मद्रास (IIT-Madras) के साथ मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक साझेदारी की है। इस साझेदारी में, आईआईटी-मद्रास इलेक्ट्रोलाइजर विकसित करेगा, और CPCL अपने रिफाइनरी में ग्रीन हाइड्रोजन की टेस्टिंग करेगा।
CPCL के प्रबंध निदेशक, अरविंद कुमार ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल आंतरिक जरूरतों के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, "इस पहल में कई उद्योग शामिल होंगे। हरित हाइड्रोजन ही भविष्य है।"
कुमार ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि आईआईटी-मद्रास मोबिलिटी सेक्टर में परीक्षण के लिए ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि CPCL उत्पादन के लिए जरूरी उपयोगिताएं उपलब्ध कराएगा। यह जानकारी उन्होंने बुधवार को चेन्नई में हुए "केमिकल सेक्टर के लिए उभरती टेक्नोलॉजी" सम्मेलन के दौरान पत्रकारों को दी।
नागपट्टिनम जिले में बनने वाले नए रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए, कुमार ने कहा कि विभिन्न पहलुओं पर बोर्ड से अनुमोदन लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, हमारे पास 1,200 एकड़ जमीन है, क्योंकि जिला प्रशासन ने हमें 612 एकड़ जमीन और सौंपी है। परियोजना को पहले ही बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है और हमने खरीद और इंजीनियरिंग गतिविधि का 7-8 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। हमें इंजीनियरिंग, प्रॉक्यूरमेंट (खरीद) और कंस्ट्रक्शन (निर्माण) (EPC) शुरू करना होगा। अब, कुछ परियोजना लागत बढ़ रही है, और हम इसे बढ़ाने के लिए बोर्ड से संपर्क करेंगे। चूंकि यह एक जॉइन्ट वेंचर प्रोजेक्ट है। इसलिए हम IOCL और मंत्रालय से भी संपर्क करेंगे। मुझे उम्मीद है कि सभी स्वीकृतियां दो से तीन महीने में पूरी हो जाएंगी और फिर हम EPC प्रदान करने के साथ आगे बढ़ सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि यह सुविधा दक्षिणी जिलों के लिए एक बढ़ावा होगी क्योंकि पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के आने के बाद यह पॉलीमर कंपनियों को आकर्षित करेगा।
नागपट्टिनम में रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 36,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश के साथ स्थापित किया जा रहा है। रिफाइनरी की क्षमता नौ मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) होगी।