उत्तर प्रदेश की बदौलत टाटा मोटर्स आज देश का सबसे बड़ी बस बनाने वाली कंपनी बन गई है। बस बनाने के मामले में टाटा मोटर्स ने कई सालों से नंबर वन के पोजीशन पर कायम अशोक लेलैंड को पछाड़ दिया है। वित्त वर्ष 2016-17 में टाटा मोटर्स के बसों की बिक्री में 26 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्ज हुई। इस दौरान कंपनी ने 18 हजार 198 बसों की बिक्री की जो कि बीते वित्त वर्ष में महज 14, 917 यूनिट की रही थी। बस श्रेणी में मजबूत वापसी की वजह एसआरटीयू (स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग्स) और निजी बाजार कारोबारों में तेज वृद्धि है। निजी श्रेणी में एसआरटीयू के निजी ऑर्डर्स के अलावा कंपनी ने सीएनजी के अलावा अंतर्राज्यीय स्तर पर चलने वाली बसों की अच्छी बिक्री की।
कंपनी ने अपने आईएमएचसीवी (इंटरमीडिएट, मीडियम और हैवी कॉमर्शियल व्हीकल) बस हिस्सेदारी में करीब 7 प्रतिशत अंक जोड़े हैं। इसमें सबसे अहम योगदान यूपी का रहा जिसमें टीएमएल को सिर्फ उत्तर प्रदेश से 1,500 बसों का ऑर्डर मिला।
राजस्थान और हरियाणा से 870 बसों और आंध्र प्रदेश से भी 630 बसों का कंपनी को ऑर्डर मिला। टाटा मोटर्स 1999 में देश में सबसे पहले सीएनजी बसों के बाद 2010 में क्रांतिकारी सीएनजी इलेक्ट्रिक हाइब्रिड बसों की पेशकश के साथ आज हम स्वच्छ, हरित शहरों के लिए स्मार्ट बसों की श्रृंखला के साथ अच्छा कारोबार कर रही है। हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के मकसद से टाटा मोटर्स ने नवंबर 2016 में केरल में भारत के पहले (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) एलएनजी बसों को भी पेश किया। एलएनजी ने स्वच्छ, सुरक्षित, सस्ते और आरामदायक यात्रा के माध्यम से सभी पक्षों के लिए लाभदायक परिस्थिति पैदा की है जो हमारे देश की ’’ऊर्जा सुरक्षा’’ सुनिश्चित करता है। हाइब्रिड प्रौद्योगिकी के लगातार बढ़ते हुए लाभों को ध्यान में रखते हुए टाटा मोटर्स ने देश की पहली फ्यूल सेल बस विकसित की है जिसे जनवरी, 2017 में प्रदर्शित किया गया।