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अशोक लेलैंड की नई तकनीकि इजाद, दूषित नहीं होगा वातावरण

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अशोक लेलैंड की आईईजीआर तकनीकि - फोटो : Ashok leyland
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देश की दूसरी सबसे बड़ी कॉमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक ऐसी तकनीकि को इजाद किया है जिससे अब वातावरण तो शुद्व रहेगा ही साथ में गाड़ी बढ़िया माइलेज भी देगी। गौरतलब है कि बीएस3 वाहनों की बिक्री पर लगे वैन में अशोक लेलैंड की 10 हजार से अधिक कॉमर्शियल गाड़ियों की इंवेटरी नहीं बिक पाई, पर कंपनी ने इसका बोझ अपने डीलरों पर नहीं डाला और सारे वाहनों को दोबारा वापस बुलाकर उसे बीएस4 इंजन के साथ तैयार करने का फैसला किया। अब अशोक लेलैंड की हर कॉमर्शियल वेहिकल में यह तकनीकि लगाई गई है। 
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इसकी जानकारी चेन्‍नई में आयोजित ग्लोबल कांफ्रेंस 2017 में अशोक लेलैंड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद के दसारी ने दी।  उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा,"अशोक लेलैंड ने अब तक कई बार इंडस्ट्री में पहली बार कई नई तकनीकि को इजाद किया है। हम नई तकनीकि के साथ भविष्य के उत्पादों को बनाने में सक्षम हैं और हमने यह सिद्व कर दिया है। हमारी इस नई तकनीकि से बीएस3 की तुलना में अब 10 फीसदी बेहतर माइलेज मिला। इस तकनीकि को 400 होर्सपावर की शक्ति तक प्रयोग किया जा सकता है। यह एक ऐसी तकनीकि है जिससे हमने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपकी जीत, हमारी जीत। मुझे पूरा भरोसा है कि इस आसान तकनीकि का फायदा हमारे सभी ग्राहकों को मिलेगा।" 
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अशोक लेलैंड की सभी गाड़ियों को इस इंजन से संपन्न बनाने में 20 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। 

आईजीआर तकनीकि के फायदे
इस नई तकनीकि से गाड़ी बीएस3 के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा माइलेज देती है।
इसे 400 होर्सपावर तक के इंजन के लिए प्रयोग किया जा सकता है
इसके लिए इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स का सहारा नहीं लिया गया है
न ही इस तकनीकि में किसी सेंसर का प्रयोग किया गया है
इसकी मेनटेनेंस कॉस्ट बेहद कम है
इसके पहले प्रयोग होने वाले एससीआर की तुलना में यह कम वजनी है
एसीआर की तुलना में इससे ज्यादा बोझ उठाया जा सकता है 
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