कोयंबटूर की एक महिला उद्यमी ने भारत का पहला स्वदेशी होवरक्राफ्ट डिजाइन करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। इस होवरक्राफ्ट की खासियत यह है कि यह जमीन और पानी दोनों पर चल सकता है।
समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोटेक पिवोट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड की प्रबंध निदेशक सुप्रिता चंद्रसेकर ने दावा किया कि होवरक्राफ्ट नाव की टेस्टिंग कोयंबटूर सुलूर झील पर सफलतापूर्वक की गई।
इस इनोवेटिव होवरक्राफ्ट को एक एम्फीबियस व्हीकल के रूप में जाना जाता है, जो विभिन्न इलाकों में निर्बाध रूप से संचालित होने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करता है।
चंद्रशेखर ने इस बात पर जोर दिया कि होवरक्राफ्ट को 'मेड इन इंडिया' पहल के तहत विकसित किया गया था। जो अंतरराष्ट्रीय विकल्पों की तुलना में लागत प्रभावी समाधान पेश करता है।
उन्होंने उत्पाद की बहुमुखी प्रतिभा पर रोशनी डालते हुए कहा कि इसमें भारतीय नौसेना, वायु सेना, सेना, एनडीआरएफ बचाव कार्यों और विभिन्न राष्ट्रीय सेवाओं के लिए संभावित तौर पर उपयोग में लाए जा सकते हैं।
होवरक्राफ्ट एक आकर्षक स्पीड लिमिट का दावा करता है। कंपनी के मुताबिक यह सड़क की सतहों पर 100 किमी प्रति घंटा और पानी पर 80 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकता है।
चंद्रशेखर ने आगे बताया कि वाहन की पेलोड क्षमता एक टन है। भविष्य में 24 सीटों की क्षमता वाला 16 मीटर लंबा होवरक्राफ्ट बनाने की योजना है।
यह तकनीकी उपलब्धि भारत के नवाचार परिदृश्य में एक उल्लेखनीय योगदान को दर्शाती है। और इसमें रक्षा से लेकर आपातकालीन प्रतिक्रिया तक विभिन्न क्षेत्रों में विविध परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता है।
कोयंबटूर में सफल परीक्षण राष्ट्र के लिए स्वदेशी होवरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है।