दुनियाभर की कंपनियां कर रही हैं दोबारा आवेदन
सिर्फ सोना कॉमस्टार ही नहीं, बल्कि दुनियाभर की कई और कंपनियों को भी चीन से ऐसे ही जवाब मिल रहे हैं। कई देश अब इस समस्या को कूटनीतिक स्तर पर हल करने की कोशिश में जुटे हैं। कंपनियां दोबारा आवेदन दे रही हैं ताकि जरूरी सप्लाई की बाधा खत्म की जा सके।
भारत और दुनिया की बड़ी कंपनियों को करती है सप्लाई
सोना कॉमस्टार कई बड़े भारतीय और विदेशी ऑटो ब्रांड्स जैसे फोर्ड, जनरल मोटर्स, टोयोटा, ह्यूंदै और फॉक्सवैगन को अहम पुर्जे सप्लाई करती है। भारत में यह कंपनी मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर जैसी कंपनियों को ट्रैक्शन मोटर्स, डिफरेंशियल असेंबली और मोटर कंट्रोल यूनिट्स जैसे इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों के पुर्जे उपलब्ध कराती है। इसकी भूमिका देश के ऑटो सेक्टर की सप्लाई चेन में बेहद अहम माना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोना कॉमस्टार की ओर से इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान या सफाई नहीं मिली है। हालांकि उनसे ईमेल के जरिए संपर्क किया गया था।
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चीन के नए नियमों में सख्ती
चीन के नए एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग नियमों के तहत अब जो कंपनियां रेयर अर्थ मैग्नेट जैसी संवेदनशील सामग्री मंगवाना चाहती हैं, उन्हें एंड-यूज सर्टिफिकेट यानी उपयोग का प्रमाण देना होता है। इसमें यह बताना होता है कि ये सामग्री कहां और कैसे इस्तेमाल की जाएगी। चीन के अधिकारी इन दस्तावेजों की पूरी जांच करने के बाद ही शिपमेंट को मंजूरी देती है।
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भारतीय कंपनियां भेज सकती हैं प्रतिनिधिमंडल
इस पूरी स्थिति को देखते हुए अब कई भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनियां मिलकर चीन को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि उनकी आरईएम इम्पोर्ट पूरी तरह सिविल और कमर्शियल उपयोग के लिए है। इसके लिए एक प्रतिनिधिमंडल चीन भेजे जाने की योजना है, लेकिन अब तक चीनी अधिकारियों से मुलाकात की कोई तारीख तय नहीं हो सकी है।
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ऑटो कंपनियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
इस मसले पर ऑटो कंपनियों की प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग रही हैं। मारुति सुजुकी ने कहा है कि भारत में उनकी उत्पादन प्रक्रिया पर इसका कोई तत्काल असर नहीं पड़ा है। हालांकि उनकी मूल कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने जापान में स्विफ्ट कार का उत्पादन कुछ समय के लिए रोक दिया है। संभवत: रेयर अर्थ कंपोनेंट्स की कमी के कारण।
टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो ने हालात को लेकर ज्यादा चिंता जताई है। टीवीएस ने बताया है कि जून या जुलाई से उनके उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कंपनी के एमडी सुदर्शन वेणु ने कहा कि ग्राहकों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। वहीं बजाज ऑटो ने भी इन्वेंट्री कम होने और उत्पादन में बड़ी रुकावट आने की चेतावनी दी है अगर जल्द ही सप्लाई बहाल नहीं हुई।
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