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Chinese EV: चीन की इलेक्ट्रिक कारों ने बदला खेल, नॉर्वे में बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

Fri, 03 Jan 2025 06:19 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नॉर्वे का EV बाजार विश्व के सबसे प्रतिस्पर्धी बाजारों में से एक माना जाता है। लेकिन यहां भी चीनी कंपनियां अपने किफायती मॉडल और अत्याधुनिक तकनीक के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
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MG4 Electric Car - फोटो : MG Motor
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विस्तार
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चीन की इलेक्ट्रिक कार कंपनियां अब वैश्विक बाजार में तेजी से अपनी पकड़ बना रही हैं। नॉर्वे जैसे विकसित और प्रतिस्पर्धी बाजार में उनकी शानदार प्रगति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। केवल पांच वर्षों में, चीनी इलेक्ट्रिक कारों ने नॉर्वे में नए कारों की बिक्री का लगभग 10% हिस्सा हासिल कर लिया है। यह आंकड़ा नॉर्वे की सड़क महासंघ (OFV) द्वारा जारी किया गया है।
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MG Comet EV with Charger - फोटो : MG Motor India
इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आगे है नॉर्वे
नॉर्वे को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के मामले में दुनिया के सबसे उन्नत देशों में से एक माना जाता है। यहां की सरकार और उपभोक्ता, दोनों ही पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं और पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। जहां यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका ने चीनी ईवी पर भारी आयात शुल्क (Import Duty) लगाया है, वहीं नॉर्वे ने अब तक चीनी वाहनों पर किसी भी प्रकार का आयात शुल्क नहीं लगाया है।

BYD Dolphin Electric Car - फोटो : BYD
चीनी ईवी ब्रांड्स की बढ़ती हिस्सेदारी
नॉर्वे में चीनी ईवी ब्रांड्स जैसे MG (SAIC मोटर का हिस्सा), BYD और XPeng की बाजार हिस्सेदारी 2024 में बढ़कर 8.8% हो गई, जो 2023 में 5.1% और 2021 में 4.1% थी। MG की पहली चीनी इलेक्ट्रिक कार जनवरी 2020 में नॉर्वे के बाजार में आई थी और तब से चीनी ईवी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

तेजी से बढ़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री - फोटो : Freepik
चीनी ईवी ब्रांड्स से घबराए पश्चिमी देश
नॉर्वे का EV बाजार विश्व के सबसे प्रतिस्पर्धी बाजारों में से एक माना जाता है। लेकिन यहां भी चीनी कंपनियां अपने किफायती मॉडल और अत्याधुनिक तकनीक के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। पश्चिमी कंपनियों को इस बात की चिंता है कि चीनी ईवी की कम कीमत उनके बाजार में बाधा बन सकती है। हालांकि, चीनी ब्रांड्स को लेकर एक समय तक यह संदेह था कि क्या उपभोक्ता इन्हें अपनाएंगे, लेकिन नॉर्वे में उनकी बढ़ती बिक्री ने इन शंकाओं को खारिज कर दिया है।

Electric Car - फोटो : FREEPIK
पश्चिमी देशों का सख्त रुख
यूरोपीय संघ ने नवंबर 2024 से चीनी ईवी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 45.3% कर दिया। यह कदम अमेरिकी निर्णय के बाद आया, जिसमें 2024 में चीनी ईवी पर आयात शुल्क 25% से बढ़ाकर 100% कर दिया गया। पश्चिमी देशों का मानना है कि चीनी ईवी कंपनियां अनुचित सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा रही हैं, जिसे चीन ने सिरे से खारिज किया है।
 
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BYD Cars - फोटो : BYD
दुनिया का सबसे बड़ा वाहन निर्यातक बना चीन
चीन 2023 में दुनिया का सबसे बड़ा वाहन निर्यातक बन गया, जब उसने वैश्विक स्तर पर 1.2 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन बेचे। चीनी ईवी निर्माताओं की आक्रामक रणनीति और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण ने उन्हें वैश्विक बाजार में सफलता दिलाई है।

नॉर्वे यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन फिर भी उसने चीनी ईवी को लेकर एक निष्पक्ष नीति अपनाई है। नॉर्वे में चीनी ईवी ब्रांड्स की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि चीनी कंपनियां अब वैश्विक बाजार में भी मजबूत चुनौती पेश कर रही हैं। हालांकि, पश्चिमी देशों के सख्त आयात नियम उनके लिए एक बाधा बन सकते हैं। फिर भी, नॉर्वे जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में चाइनीज इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि वे वैश्विक ईवी बाजार में एक बड़ी ताकत बनकर उभर रही हैं।
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