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Chinese Cars: चीनी कार निर्माता चाहते हैं कि चीन यूरोपीय कारों के खिलाफ छेड़े टैरिफ वार, जानें क्या है वजह

Wed, 19 Jun 2024 05:15 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चीन की इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और यूरोपीय ब्रांडों की इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। और अब यह सिर्फ उत्पादों और फीचर्स के बारे में नहीं रह गया है। बल्कि वैश्विक व्यापार क्षेत्रों के दायरे में आ चुका है।
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Nio Electric Car - फोटो : Nio
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चीन की इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और यूरोपीय ब्रांडों की इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। और अब यह सिर्फ उत्पादों और फीचर्स के बारे में नहीं रह गया है। बल्कि वैश्विक व्यापार क्षेत्रों के दायरे में आ चुका है। यूरोपीय आयोग द्वारा यूरोप में आने वाले चीन निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों पर अलग-अलग दरों पर शुल्क लगाने के बाद, चीनी ब्रांड अब चीनी सरकार से जवाबी कार्रवाई करने के लिए कह रहे हैं।
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यूरोपीय आयोग इस बात की जांच कर रहा था कि क्या यूरोप में निर्यात किए जा रहे चीनी ईवी चीन में विकृत सब्सिडी से लाभ उठा रहे हैं। और इस तरह ऐसे ब्रांडों को यूरोपीय ग्राहकों के लिए कम कीमतें बनाए रखने में मदद मिल रही है। इस महीने की शुरुआत में, आयोग ने यूरोप में ऐसे वाहनों पर 38.1 प्रतिशत तक के शुल्क का एलान किया। यह एक ऐसा कदम है जिससे यूरोप के विभिन्न बाजारों में चीनी ईवी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस कदम की न सिर्फ चीनी अधिकारियों ने बल्कि कई यूरोपीय वाहन निर्माताओं ने भी आलोचना की है।

तीखे शब्दों के अलावा, चीनी सरकार से अभी तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं आई है, लेकिन चीनी वाहन निर्माताओं की चाहत है कि कुछ और हो। सरकार द्वारा समर्थित ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीनी कार कंपनियों ने बीजिंग से चीन में बेची जा रहीं यूरोपीय ब्रांडों की कंब्शन इंजन वाली कारों पर शुल्क बढ़ाने का आग्रह किया है। यह कदम, अगर सफल होता है, तो यूरोपीय दिग्गजों को बहुत प्रभावित कर सकता है। जो पहले से ही चीन में भारी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार बाजार होने के साथ-साथ दुनिया का सबसे बड़ा ईवी बाजार भी है।

चीन के शुल्क बढ़ाने से यूरोपीय कार ब्रांड पर क्या असर होगा?
इस समय, चीन विदेशी बाजारों से देश में आयात की जाने वाली कारों पर 15 प्रतिशत का शुल्क लगाता है। चीनी वाहन बाजार जीवंत है जहां वैश्विक ब्रांडों को न सिर्फ एक-दूसरे के साथ बल्कि स्थानीय कंपनियों की एक लंबी सूची के साथ भी प्रतिस्पर्धा करनी होती है। जो ज्यादातर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद प्रदान करती हैं।

आयातित कारों पर आयात शुल्क बढ़ाने से वैश्विक ब्रांडों के वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। जो बदले में, संभावित ग्राहकों के लिए स्थानीय उत्पादों को और भी ज्यादा व्यवहार्य बना सकता है।
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यही वह डर था जिसे मर्सिडीज, फॉक्सवैगन और बीएमडब्ल्यू जैसे ब्रांडों ने चीन की कारों पर शुल्क लगाने के यूरोपीय आयोग के कदम की आलोचना करते समय जताया था।
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