चीन में निर्यातकों को 1 दिसंबर से परमिट के लिए आवेदन करने की आवश्यकता होगी, जिसमें अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान शीर्ष आयातकों में से हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मशीनरी, पेट्रोकेमिकल, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों के लिए बैटरी, फ्यूल सेल और लूब्रिकेंट्स बनाने के लिए ग्रेफाइट का व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, "हाल के वर्षों में मांग बढ़ी है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कच्चा माल है।"
चीन ने 2022 में कुल विश्व ग्रेफाइट आपूर्ति का अनुमानित 65 प्रतिशत उत्पादन किया।
देश के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "विशिष्ट ग्रेफाइट वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लगाना एक आम अंतरराष्ट्रीय प्रथा है। दुनिया के सबसे बड़े ग्रेफाइट उत्पादक और निर्यातक के रूप में, चीन लंबे समय से नॉन-प्रोलिफरेशन (अप्रसार) जैसे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को मजबूती से पूरा कर रहा है।"
ईवी बैटरी
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मंत्रालय ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा की जरूरत के आधार पर, चीन ने कानून के अनुसार विशिष्ट ग्रेफाइट वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू किया है, और कुछ ग्रेफाइट वस्तुओं पर अस्थायी नियंत्रण लागू किया है।"
जैसे-जैसे अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से तकनीकी प्रतिबंध - विशेष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में - बढ़ते जा रहे हैं, चीन ने भी 'जैसे को तैसा' नीति पर कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर अपनी पकड़ कड़ी कर दी है।
इस हफते की शुरुआत में, अमेरिका ने चीन-विशिष्ट एनवीडिया और इंटेल ग्राफिक प्रोसेसिंग इकाइयों (जीपीयू) पर निर्यात प्रतिबंध लगाया था।
जुलाई में, बीजिंग ने गैलियम और जर्मेनियम, सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली दो प्रमुख सामग्रियों और "जिन पर चीन का अर्ध-एकाधिकार है" पर निर्यात नियंत्रण की घोषणा की।