निर्यात में भारी उछाल
कोविड-19 से पहले चीन हर साल करीब 10 लाख वाहन एक्सपोर्ट (निर्यात) करता था। लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 65 लाख तक पहुंच गई है। इनमें से लगभग 76 प्रतिशत पेट्रोल कारें हैं, इलेक्ट्रिक नहीं। इसी तेजी की वजह से 2023 में चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार निर्यातक बन गया।
चीन के लिए पुराने पेट्रोल कार कारखानों को बंद करना आर्थिक रूप से कठिन है। इसलिए कंपनियां बड़े पैमाने पर इन वाहनों को विदेश भेज रही हैं।
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सरकार-समर्थित कंपनियों की आक्रामक रणनीति
SAIC (एसएआईसी), BAIC (बीएआईसी), Dongfeng (डॉन्गफेंग) और Changan (चांगन) जैसे सरकारी समर्थन वाली कंपनियां इस ट्रेंड की सबसे बड़ी लाभार्थी बन गई हैं। घरेलू ईवी प्रतियोगिता के कारण उनकी जॉइंट-वेंचर कारों की बिक्री गिर रही है। ऐसे में, उत्पादन जारी रखने का सबसे आसान तरीका है, पेट्रोल कारों को दुनिया भर के बाजारों में बेचना।
इन कंपनियों के लिए निर्यात अब अस्तित्व का सवाल बन चुका है।
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उभरते देशों में क्यों बढ़ रही है मांग
चीन की पेट्रोल कारों का रुख पश्चिमी यूरोप या अमेरिका की ओर नहीं है। ये वाहन खाततौर पर उभरते और दूसरे स्तर के बाजारों में पहुंच रहे हैं। जैसे उरुग्वे, मैक्सिको, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप के कई देश।
इन क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, और इलेक्ट्रिक गाड़ियां महंगी व कम प्रैक्टिकल मानी जाती हैं। ऐसे में सस्ती, फीचर-लोडेड चीनी पेट्रोल कारें खरीदारों को आसानी से आकर्षित कर रही हैं। बड़े केबिन, मॉडर्न डिजाइन और कम कीमत, यह स्थानीय ग्राहकों के लिए यह परफेक्ट कॉम्बिनेशन बन गया है।
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वैश्विक ऑटो उद्योग पर असर
कम अवधि में इन देशों के ग्राहकों को अच्छा-खासा फायदा मिल रहा है। उन्हें कम दामों में अच्छे फीचर्स वाली कारें मिलती हैं। लेकिन पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और स्थानीय निर्माताओं पर बड़ा दबाव बन रहा है।
चीन की सरप्लस क्षमता और सरकारी सहयोग ने पेट्रोल कारों को इतना सस्ता बना दिया है कि कई विदेशी व स्थानीय ब्रांडों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
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लंबे समय में इसका अर्थ है दो-स्तरीय संक्रमण है-
- एक तरफ चीन तेजी से इलेक्ट्रिक भविष्य की ओर बढ़ रहा है,
- दूसरी ओर चीन की वही पुरानी पेट्रोल कारें दुनिया के अन्य हिस्सों में सड़कें भर रही हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि बाकी देश और कार निर्माता इस चुनौती का कैसे सामना करेंगे। कहीं ऐसा न हो कि बिना बिकी चीनी कारों की बाढ़ वैश्विक ऑटो मार्केट को हमेशा के लिए बदल दे।
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