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Car Gear Box: जानें कार में कितने तरह के होते हैं गियरबॉक्स, तकनीक में बदलाव से वाहन पर क्या असर? जानिए सब कुछ

Wed, 06 Nov 2024 07:43 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय यात्री वाहन बाजार में, कई तरह की ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनमें एएमटी, आईएमटी, डीसीटी और सीवीटी शामिल हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि मैनुअल की तुलना में इन ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में क्या अंतर होता है।
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Car Gearbox Types - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारतीय शहर अपने ट्रैफिक जाम के लिए भी जाने जाते हैं। शहरों की सड़कों को वाहनों की संख्या ज्यादा होने की वजह से अत्यधिक भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक की स्थिति के लिए जाना जाता है। ऐसे में कार ड्राइविंग बहुत थकाऊ काम हो जाता है। क्योंकि ट्रैफिक की भीड़ में बार-बार क्लच, ब्रेक और एक्सीलरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक की स्थिति में, मैन्युअल कार चलाने की तुलना में, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारों को चलाना आराम का मामला होता है। 
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Car Driving Tips - फोटो : Freepik
ड्राइविंग की इन परिस्थितियों में ऑटोमैटिक कारों में लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी है। क्लचलेस डुअल-पेडल टेक्नोलॉजी (क्लच रहित डुअल-पेडल तकनीक) को आमतौर पर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के नाम से जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में पूरे भारत में यह कार चलाने वालों की पसंद बन कर उभरा है। साथ ही, ऐसे वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है। 

भारतीय यात्री वाहन बाजार में, कई तरह की ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनमें एएमटी, आईएमटी, डीसीटी और सीवीटी शामिल हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि मैनुअल की तुलना में इन ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में क्या अंतर होता है।

मैनुअल ट्रांसमिशन
मैनुअल ट्रांसमिशन में, ड्राइवर क्लच पेडल दबाता है और गियर स्टिक का इस्तेमाल करके मैन्युअल तरीके से गियर बदलता है। क्लच पेडल इंजन को पहियों से अलग करता है, जिससे गियर आसानी से शिफ्ट हो जाते हैं। इस तरह का ट्रांसमिशन फुल कंट्रोल देता है, जो इसे ड्राइविंग के शौकीनों के बीच लोकप्रिय बनाता है। यह ऑटोमैटिक गियरबॉक्स की तुलना में बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी भी देता है।

ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की तुलना में मैनुअल ज्यादातर सरल और ज्यादा टिकाऊ होते हैं। और इनकी मरम्मत की लागत भी कम होती है। इस ट्रांसमिशन के साथ बार-बार गियर शिफ्ट करना और क्लच दबाना थका देने वाला हो सकता है, खासकर भारी ट्रैफिक में। इसमें महारत हासिल करना सबसे कठिन है। और नए ड्राइवर के लिए यह और भी मुश्किल है।

ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT)
AMT को सेमी-ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के रूप में भी जाना जाता है। यह मैनुअल ट्रांसमिशन की मूल बातों को ऑटोमेटेड क्लच ऑपरेशन के साथ जोड़ता है। इसमें कोई जटिल असेंबली नहीं होती है, बल्कि क्लच को संचालित करने और गियर बदलने के लिए सिर्फ ऑटोमैटिक एक्चुएशन का इस्तेमाल करता है।

मैनुअल ट्रांसमिशन की तरह ही, यह आम तौर पर फ्यूल एफिशिएंट होता है। यह अन्य ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन टाइप की तुलना में बहुत ज्यादा किफायती कीमत पर भी आता है। शहर के ट्रैफिक में मैनुअल की तुलना में इस तरह के ट्रांसमिशन को चलाना आसान होता है।

इस तरह के सेटअप में कुछ खामियां हैं, जिसमें कम रफ्तार पर हल्का लैग करना या झटका शामिल है। यह DCT जैसे अन्य ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन जितना तेज या प्रतिक्रियाशील भी नहीं है।

इंटेलिजेंट मैनुअल ट्रांसमिशन (iMT)
iMT क्लच पेडल के बिना मैनुअल गियरबॉक्स का कंट्रोल देता है। सिस्टम सेंसर का इस्तेमाल करके पता लगाता है कि ड्राइवर कब गियर बदलने वाला है और एक एक्ट्यूएटर ऑटोमैटिक तरीके से क्लच को एंगेज (संलग्न) और डिसएंगेज (अलग) करता है। आप गियर बदलने के लिए अभी भी स्टिक का उपयोग करते हैं, लेकिन क्लच के बिना।

एक iMT आमतौर पर पारंपरिक ऑटोमैटिक्स की तुलना में ज्यादा कुशल होता है। और AMT की तुलना में गियर शिफ्ट को ज्यादा सहज बनाता है। एकमात्र कमी यह है कि यह ट्रांसमिशन कम मॉडलों में उपलब्ध है क्योंकि यह तुलनात्मक रूप से नई टेक्नोलॉजी है।

डुअल-क्लच ट्रांसमिशन (DCT)
DCT एक ऐसा सेटअप है जिसमें ऑड (विषम) और ईवन (सम) गियर के लिए दो अलग-अलग क्लच का इस्तेमाल किया जाता है। इसे खास तौर पर हाई परफॉर्मेंस उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। ताकि तेजी से गियर बदलाव किया जा सके। एक क्लच हमेशा अगले गियर के लिए तैयार रहता है जबकि दूसरा अलग हो जाता है। यह ड्राइवरों को लचीलापन देते हुए मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों मोड प्रदान करता है।

ये ट्रांसमिशन रेसिंग और आक्रामक शिफ्टिंग के लिए अत्यधिक कुशल हैं। क्योंकि वे शिफ्ट के दौरान पावर लॉस को कम करते हैं। यह इलेक्ट्रॉनिक रूप से तेज होने के साथ-साथ मैनुअल जैसा कंट्रोल देता है। वे सबसे महंगे हैं और सर्विस किए जाने पर उनकी मरम्मत महंगी पड़ सकती है।

कंटीन्यूअस वेरिएबल ट्रांसमिशन (CVT)
अन्य सभी गियर-आधारित सिस्टम के उलट, CVT गियर रेशियो के बहुत सारे रेंज प्रदान करने के लिए बेल्ट और पुली का इस्तेमाल करता है। यह निश्चित गियर की प्रतिबद्धता के बिना निर्बाध एक्सीलरेशन को सक्षम बनाता है। CVT एक स्मूद और स्थिर एक्सीलरेशन भी प्रदान करता है। क्योंकि इसमें कोई स्पेशल 'शिफ्ट शॉक' नहीं होता है। जो अन्य सिस्टम पर गियर की शिफ्टिंग के दौरान महसूस होता है। CVT शहर में बहुत ही आरामदायक ड्राइविंग एक्सपीरियंस देता है। और इसलिए इन्हें ज्यादातर एक्जीक्यूटिव सेडान कारों में देखा जा सकता है। 
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हालांकि, इस सिस्टम की सीमा की बात की जाए तो, गियर शिफ्ट की कमी के कारण ड्राइविंग के कम आकर्षक होने का एहसास होता है। जब गाड़ी को तुरंत पावर की जरूरत होती है, तो सिस्टम स्वाभाविक रूप से एक अंतराल (लैग) देता है। जिसे 'रबरबैंड इफेक्ट' के रूप में जाना जाता है। जिसमें इंजन पहले हाई स्पीड पर चलता है और वाहन थोड़ी देर बाद रफ्तार पकड़ता है। इस कारण से यह हाई परफॉर्मेंस वाली गाड़ियों के लिए आदर्श नहीं है।
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