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TATA HEXA: खूबसूरती का अनूठा प्रदर्शन

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टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
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हमें खूबसूरती पसंद है और अगर कोई चीज हमें देखने में अच्छी लग गई तो फिर सबकुछ भूलकर हम उस पर टूट पड़ते हैं। यह बात मैं बहुत गर्व के साथ भारतीयों के संदर्भ में कर रहा हूं। अगर हमारा दिल जीतना है तो चीजों को सुंदर बनाना बेहद जरूरी है। रेनो क्विड, रेनो डस्टर, महिंद्रा एक्सयूवी, फोर्ड ईकोस्पोर्ट ये वो गाड़ियां हैं जिन्हें हमने तहेदिल से इज्जत दी और आज ये गाड़ियां देश में लाखों लोगों की हसरत बनी हुई है। लेकिन हमारी भारतीय ऑटो कंपनियों ने इस बात को समझने में थोड़ा वक्त लगा दिया। लेकिन कहते हैं न देर आए दुरुस्त आए। यह कहावत ठीक साबित हुई है टाटा मोटर्स पर। टाटा टियागो की खूबसूरत प्रस्तुति के बाद अब टाटा मोटर्स हेक्सा के जरिए लोगों का दिल जीतने में एक बार फिर कामयाब रही है। मैं इसकी इंजीनियरिंग, माइलेज, परफॉर्मेंस के साथ सबकुछ बताऊंगा लेकिन इस इंट्रो में सबसे पहले मैं यह बता दूं कि यह एक खूबसूूरत एसयूवी है और यह हमें पसंद आई है। तो आइए आपको लिए चलते हैं मायानगरी मुंबई जहां से हम टाटा हेक्सा की ड्राइव शुरू करने वाले हैं। हमारे इस पड़ाव में पुणे के साथ-साथ खंडाला और लोनावला की भी आपको झलक देखने को मिलेगी। 
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हेक्सा की डिजाइन भाषा कुछ कहती है

तीखे कॉर्नर्स पर इसकी स्थिरता बनी रहती है। - फोटो : Amit Dwivedi
एमयूवी की बात करें तो अभी तक कार ‌कंपनियों ने इस पर कोई खास काम नहीं किया था। इसके बावजूद इस वर्ग में लगभग सभी गाड़ियों को बाजार से अच्छा रिस्पांस मिला है। टोयोटा इनोवा के आने के बाद अन्य ऑटो कंपनियों पर दबाव आ गया था। लेकिन अतीत को देखते हुए कोई उम्मीद भी नहीं कर रहा था कि टाटा की एक गाड़ी बाजार में आएगी और अपने डिजाइन से लोगों को मंत्रमुग्‍ध कर लेगी। लेकिन ऐसा ही टाटा ने अपनी हेक्सा से किया। यह एक एमयूवी जैसी एसयूवी है और एक व्यावहारिक लेआऊट के साथ अपना वह काम पूरा कर देती है जिसकी उम्मीद आप एक सात लोगों वाले परिवार के साथ करते हैं। इसे बाहर से देखने से पता चल जाता है कि यह सात सीटर कार है। इसकी तीसरी पंक्ति का भी लेआऊट ऐसा है जिसमें यात्री आराम से बैठ सकते हैं। टाटा की डिजाइन टीम ने इसे बनाते वक्त इस बात का ध्यान रखा है कि लुक में अग्रेसिव करैक्टर ज्यादा उभरकर न आए। इसके बावजूद यह इसकी थोड़ी आक्रामकता इसकी बाहरी छवि में दिख्‍ा जाती है। सामने से अधिक इसका रियर प्रभावशाली लगता है, अगर आप इसे पीछे से देखेंगे तो जल्दबाजी में टाटा का लोगो मिस कर देंगे तो मानकर चलिए आपके दिमाग में किसी जर्मन एसयूवी की छवि कौंध सकती है। सभी हिस्सों में क्रोम का खूब इस्तेमाल किया गया है, और इस वजह से इसकी प्रीमियमनेस को बढ़ाने का काम करता है। हेक्सा का साइज और डिजाइन रोड पर इसकी प्रेजेंस को दमदार बनाता है। अपनी लॉन्चिंग के दो महीने के बाद भी इसे देखकर लोग आपकी तरफ मुड़ते हैं। मुंबई से पुणे की ड्राइविंग में लोगों का कुछ ऐसा ही रिस्पांस हमें देखने को मिला।

फीचर्स पर एक नजर

टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
हेक्सा में फीचर्स की एक लंबी सूची है। इसके तहत इसमें कई ऐसे व्यावहारिक फीचर दिए गए हैं जो आज के समय से काफी मेल खाते हैं। इसमें 6 एयरबैग्स, एबीएस-ईबीडी, ईएसपी, टरेन कंट्रोल, हिल होल्ड एंड डिसेंट कंट्रोल, सन ब्लाइंड्स, क्रूज कंट्रोल, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल विद डुअल एसी, रियर व्यू कैमरा विद पार्किंग सेंसर्स जैसे फीचर्स दिए गए हैं। 10 जेबीएल स्पीकर्स के साथ हरमन का टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है। इसका साउंड सिस्टम मुझे बहुत पसंद आया। हैचबैक टियागो में दिखे स्मार्टफोन एप का एडवान्स वर्जन यहां मिलेगा। इसमें नेविगेशन, ज्यूक कार, स्मार्ट रिमोट समेत कई एप्स का कॉम्बो दिया गया है। न सिर्फ एक साथ कई लोग अपने फोन से म्यूजिक शेयर और कंट्रोल कर सकते हैं बल्कि गाड़ी में दी गई रंगो की एंबिएंट लाइटिंग को भी किसी भी सीट पर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता है। मूड के हिसाब से लाइटिंग वाला सिस्‍टम भी काफी मजेदार लगा। टाटा ने हेक्सा में अगर एक सनरूफ दिया होता तो और मजा आ जाता और यह इस वर्ग में सबसे अलग कार बन जाती। मुंबई-पुने एक्सप्रेसवे पर आपके साथ कोई बैठा है तो वह ऐसी ख्वाहिश रखता है जिससे वो कार की छत से खुले आसमान को निहार सके।

 

व्यावहारिक इंटीरियर 

टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
लैडर फ्रेम पर बनाई गई हेक्सा में बैठने के लिए ऐसा लगता है जैसे आप कोई सीढ़ी चढ़ रहे हों। इसका ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस इसकी केबिन को और जगह वाला बनाने में मददगार साबित हुआ है। कुल मिलाकर आपको इसके केबिन में बैठकर निराशा हाथ नहीं लगेगी। मुझे इसमें दी गई सीटों का टच बहुत प्यारा लगा। इसमें सॉफ्ट टच प्लास्टिक, लेदर का इस्तेमाल खूब  किया गया है। लेकिन कुछ चीजें निराश भी करती हैं जैसे कि इसमें दी गई कम जगह के कारण आप अपना छोटा मोटा सामान रखने के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे। सीटों का डिजाइन प्रीमियम है और इसमें लग्जरी की कमी नहीं खलती। पहली दूसरी पंक्ति में जगह की कोई कमी नहीं है, लेकिन तीसरी रो में हेडरूम थोड़ा कम है पर तीसरी पंक्ति में आप ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि वहां पर जगह बनाना इतना आसान काम नहीं है। इस कार को खरीदकर तीसरी पंक्ति में अगर दो लोगों को बिठाएंगे तो कोई मुश्किल नहीं आएगी। एक्सयूवी से अगर इसकी तुलना करें तो यह तीसरी पंक्ति के मामले में आसानी से बाजी मार लेती है। इसके केबिन में एसी के 7 वेंट दिए गए हैं जो कि पर्याप्त हैं इस केबिन को ठंडा रखने के लिए। 
 

इंजन परफॉर्मेंस

टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
टाटा ने हेक्सा में सफारी स्टॉर्म वाले 2.2 लीटर डीजल इंजन को ही लगाया है। बस यही चीज मुझे थोड़ी खलती है क्योंकि यह इंजन बहुत पारंपरिक हो चुका है अगर इसकी समसामायिकता पर थोड़ा ध्यान दिया जाता खासकरके हेक्सा के लिए तो ज्यादा अच्छा होता। मैंने इसकी मैनुअल कार को ड्राइव किया और इस दौरान लगभग 800 किलोमीटर की दूरी तय की। इसमें एक ही स्‍पेसीि‍फकेशन वाले दो इंजन लगे हैं एक अपनी भूमिका मैनुअल के अदा करता है तो दूसरी जिम्‍मेवारी का निर्वहन इसके 6 स्‍पीड ऑटोमेटिक के लिए करता है। इसका एक्‍सएम और एक्‍सटी वेरिएंट वाला इंजन 156 पीएस की शक्ति व 400 एनएम का टॉर्क देता है जबकि एक्‍सई में प्रयोग किया गया 2.2 लीटर वैरीकोर इंजन 150 पीएस की शक्ति व 320 एनएम का टॉर्क देता है। लेकिन मैनुअल ट्रांसमिशन पूरी तरह से निराश करता है जो खूबसूरती इस कार में झलकती है जब बात प्रदर्शन की आती है तो यह काफी पीछे रह जाती है। हालांकि तारीफ करनी होगी केबिन की जिसमें बाहर की आवाज बहुत कम आती है खास करके जब आप हाईवे पर होते हैं। 

पहाड़ी रास्तों का सफर

टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
हेक्सा मैनुअल पहाड़ी रास्तों पर हमेशा संघर्ष करती नजर आती है। लेकिन इसके बावजूद मोड़ों पर लयबद्वता दिखाते हुए यह गाड़ी यह बताने की कोशिश करती है कि अगर इसकी इंजन इंजीनियरिंग और ट्रांसमिशन पर थोड़ा और ध्‍यान दिया गया होता तो इसमें कोई कमी नहीं रह जाती। लोनावला स्थित टाइगर हिल पहुंचने में जिस तरह से मैं इसकी शिफटिंग से खेल रहा था मुझे काफी बुरा लग रहा था कि एक ऐसी गाड़ी जिसमें 2000 सीसी से अधिक का इंजन लगा है उसे कम मुश्किल पहाड़ियां चढ़ने में भी दिक्कत महसूस होती है। हालांकि जब मैं इसके ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन को ड्राइव कर लूंगा तब आपको बताऊंगा कि इन दोनों ट्रांसमिशन में से हेक्सा में क्या ज्यादा अच्छा है। 
 

कंफर्ट व सहूलियत

टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
मैनुअल हेक्सा में फुट वैल कुछ ज्यादा ही संकरा है। यहां आपको लंबी राइड के दौरान बाएं पैर को आराम देने में परेशानी आएगी। मैनुअल गियरबॉक्स एकदम स्मूद नहीं है। मैं मानकर चल रहा हूं कि आने वाले एक दो फेसलिफ्ट में टाटा जरूर इसे सुधारने की कोशिश करेगी। मैनुअल वैरिएंट में बेहद अडवान्स माना जाने वाला सुपर ड्राइव मोड फीचर (लैंड रोवर के टरेन कंट्रोल की तरह) दिया गया है। जो आपको ऑटो, कंफर्ट, डायनैमिक और रफ रोड जैसी ड्राइव कंडिशन चुनने की चॉइस देता है और गाड़ी की पावर और ईएसपी समेत कई चीजों को दी गई कंडिशन के हिसाब से ट्यून करता है। ऑल वील ड्राइव का फीचर भी सेगमेंट में पहला है, जो इसे ऑफ रोडिंग के लिए भी बेहतर विकल्प बनाता है।

 
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टाटा हेक्सा - फोटो : Amit Dwivedi
हमारा फैसला
अगर आप एक्सयूवी के शौकीन हैं तो आपके लिए एक और बढ़िया विकल्प बाजार में आ गया है। इसकी कीमत 11.99 लाख रुपये से लेकर 17.49 लाख रुपये एक्सशोरूम दिल्ली तक है। एक्सई, एक्सएम, एक्सएमए, एक्सटी, एक्सटीए, एक्सटी 4*4 वेरिएंट में उपलब्‍ध यह कार कीमत के हिसाब से काफी आकर्षक है। इस कीमत में यह महिंद्रा की एक्सयूवी को सीधे तौर पर चुनौती दे रही है। कंपनी का दावा है कि यह 17.6 किमीप्रली का माइलेज देती है। लेकिन आपको बता दें वास्तव में आपको सर्वश्रेष्ठ ड्राइविंग के बाद भी 12 से अधिक माइलेज नहीं मिलेगा। पर इसके बावजूद एक बड़े परिवार के लिए यह फायदे का सौदा है। आने वाले समय में हम उम्मीद कर रहे हैं कि हेक्सा और व्यावहारिक बनेगी जैसा कि महिंद्रा की एक्सयूवी के साथ हुआ है। 
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