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Auto Market: भारत के घरेलू ऑटो बाजार में बढ़ रहा है इन्वेंट्री का लेवल! मानसून में मिल रही छूट कर रही इशारा

Fri, 19 Jul 2024 09:34 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विभिन्न कार शोरूम में चुनिंदा मॉडलों पर मानसून स्पेशल डिस्काउंट दिया जा रहा है, जो एक लाख रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का है। क्या भारत के घरेलू ऑटो बाजार में बढ़ रहा है इन्वेंट्री का लेवल? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ।
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Car Showroom - फोटो : Freepik
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विस्तार
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विभिन्न कार शोरूम में चुनिंदा मॉडलों पर मानसून स्पेशल डिस्काउंट दिया जा रहा है, जो एक लाख रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का है। ऑटो डिस्काउंट आम तौर पर त्योहारों के मौसम में आते हैं, जो आमतौर पर सितंबर में शुरू होता है। हालांकि ग्राहकों के लिए यह फायदेमंद है, लेकिन इतनी जल्दी डिस्काउंट मिलना डीलरों के लिए बढ़ते स्टॉक की ओर इशारा करता है।
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फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के अध्यक्ष मनीष राज सिंघानिया  कहना है कि "इन्वेंट्री का लेवल जितना अधिक होगा, डिस्काउंट उतना ही ज्यादा होगा।"

इन्वेंट्री का स्तर बढ़ने के साथ, वाहन निर्माता मासिक आधार पर डिस्काउंट बढ़ा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अभी कार खरीदने का सबसे अच्छा समय है क्योंकि वाहन निर्माता अपने स्टॉक को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

दूसरी ओर, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) से इन्वेंट्री कम करने के लिए जिम्मेदार फैसले लेने की अपेक्षा करता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कंसल्टिंग फर्म Deloitte Asia Pacific (डेलॉइट एशिया पैसिफिक) में पार्टनर और उपभोक्ता उद्योग प्रमुख राजीव सिंह कहते हैं, "भारत में, बिक्री मौसमी होती है और आम तौर पर साल के आखिर और फिर मार्च में चरम पर होती है। दशहरा से दिवाली तक त्योहारों के मौसम में बिक्री में उल्लेखनीय तेजी आती है।" सिंह के अनुसार, अप्रैल और सितंबर के बीच उद्योग एक सुस्त दौर देखता है, उसके बाद 17 दिनों का श्राद्ध का समय होता है, जिसे हिंदू कोई खरीदारी नहीं करते हैं। वे कहते हैं, "डिस्काउंट सिर्फ अगले दो महीनों के लिए ही जारी रहेंगे।"

ज्यादा स्टॉक
ऑटो डीलरों के पास आमतौर पर 35 दिनों तक का स्टॉक होता है। लेकिन FADA का कहना है कि इन्वेंट्री का स्तर अभी 62-67 दिनों पर है। क्योंकि OEM ने बाजार में भारी मात्रा में स्टॉक भर दिया है।

सिंघानिया का मानना है कि आने वाले समय में भी इन्वेंट्री का स्तर कुछ ऐसा ही रहने की संभावना है। 

सिंह इसके उलट, इन्वेंट्री लेवल के साल के आखिर तक सामान्य होने की उम्मीद करते हैं। सिंह कहते हैं, "यह (इन्वेंट्री लेवल) ठीक हो जाएगा। डीलरों को धन का घूमना (रोटेशन) बनाए रखने की जरूरत है। इसलिए, वे निर्माताओं से ज्यादा स्टॉक स्वीकार नहीं करेंगे।"

मांग में सुस्ती के कुछ कारण मानसून में देरी, अत्यधिक गर्मी और लोकसभा चुनाव हैं। लेकिन, विश्लेषक ऑटो उद्योग में भी सामान्य मंदी का हवाला दे रहे हैं। Deloitte के सिंह का कहना है कि मंदी जनवरी में शुरू हुई थी।

उद्योग में वैश्विक मंदी वित्त वर्ष 23 में शुरू हुई थी। कोविड के बाद, मांग में अचानक उछाल आया था। सिंह बताते हैं कि उपभोक्ता की प्राथमिकता में बदलाव, वस्तुओं की मांग से सर्विस की मांग की ओर बदलाव, मंदी के पीछे का कारण है। उद्योग को 3-5 प्रतिशत की गिरावट की भी आशंका है।

सिंह कहते हैं, "इस साल यात्री वाहनों की हमारी मांग कमजोर रहेगी, क्योंकि संचित मांग [घट रही है]। हमेशा उसी स्तर पर बने रहना हमारे लिए संभव नहीं होगा। इस साल कुछ सुधार होंगे। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण अभी भी मजबूत है।"
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सिंह का तर्क है कि यह उद्योग जीडीपी में 7 प्रतिशत का योगदान देता है और मंदी के व्यापक प्रभाव होंगे। जबकि सरकार अगले 10 वर्षों में जीडीपी में उद्योग के 10-12 प्रतिशत योगदान की उम्मीद करती है। यह संभावना नहीं है क्योंकि यह क्षेत्र जीडीपी के समान गति से बढ़ रहा है।

सिंह कहते हैं, "आने वाले छह से आठ वर्षों में कम से कम उद्योग हमारे जीडीपी में सिर्फ 7 प्रतिशत या 8 प्रतिशत का ही योगदान देना जारी रख सकता है। मुझे नहीं लगता कि यह तब तक बदलेगा जब तक भारत चीन की तरह कारों का एक बड़ा निर्यातक बनने का फैसला नहीं करता।"
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