आपको जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी गाड़ी में उसकी इंजन की क्षमता को सीसी यानी क्यूबिक कैपेसिटी में बताया जाता है। इंजन की सीसी जितनी अधिक होगी, उसका सिलेंडर भी उतना ही बड़ा होगा। साधारम सीसी की तुलना में अधिक सीसी वाले वाहनों में फ्यूल और हवा की खपत करने की क्षमता अधिक होती है। सिलेंडर के भीतर जितनी भी खाली जगह होती है, उतने ही सीसी का इंजन होता है।
किसी भी वाहन में बीएचपी को ब्रेक हॉर्सपावर कहते हैं। इसका इस्तेमाल इंजन की क्षमता बताने के लिए किया जाता है। छोटी गाड़ियों में अधिकतम 100 से 120 बीएचपी की ताकत मिलती है। मध्यम साइज वाली गाड़ियों में 120 से 200 बीएचपी की पावर मिलती है। वहीं, हाई परफॉर्मेंस या सुपर कारों में ज्यादा बीएचपी की ताकत मिलती है। वाहन में जितनी ज्यादा बीएचपी होगी, उसमें उतनी ही तेज गति से चलने की क्षमता होगी।
गाड़ियों में टॉर्क को एनएम यानी न्यूटन मीटर कहा जाता है। विज्ञान के हिसाब से इसका इस्तेमाल किसी चीज को घुमाने में लगने वाली ताकत को कहा जाता है। एनएम की बदौलत यह पता चलता है कि गाड़ी के इंजन में वाहन को खींचने की कितनी ताकत है। जब भी गाड़ी ऑन करते हैं और कार के एक्सेलेरेटर को दबाते हैं तो उस समय पर एक ताकत पैदा होती है, जिसकी मदद से इंजन गाड़ी को खींच पाता है, इस दौरान एक हल्का सा झटका लगता है, जिसे टार्क कहते हैं।
वाहनों में आने वाले आरपीएम को रेवोल्यूशन पर मिनट कहते हैं। आरपीएम की मदद से यह पता लगा सकते हैं कि इंजन में लगा फ्रैकशॉक एक मिनट में कितनी बार घूम रहा है। वाहन के इंजन में पिस्टन एक मिनट में कितनी बार ऊपर-नीचे होता है, इसे ही आरपीएम के तौर पर देखते हैं। अधिक आरपीएम होने से इंजन ज्यादा ताकत पैदा करेगा। वहीं, इंजन जो भी ताकत पैदा करेगा, वो गियर की मदद से वाहन के पहियों तक पहुंचती है। ऐसे में गाड़ी की रफ्तार तेज होती है।