कार एयर प्यूरीफायर कैसे काम करता है
एक असली कार एयर प्यूरीफायर आमतौर पर तीन तरह के फिल्टरों पर आधारित होता है। कार में हवा की सफाई की क्षमता काफी हद तक फिल्टर की क्वालिटी और 'क्लीन एयर डिलीवरी रेट' (CADR) पर निर्भर करती है। चूंकि कार का केबिन सीमित वॉल्यूम वाला बंद स्पेस है, इसलिए छोटा प्यूरीफायर भी यहां घर की तुलना में अधिक असर दिखा सकता है।
इसके साथ ही, एसी को 'रीसर्क्युलेशन मोड' पर चलाने से बाहर की गंदी हवा के केबिन में आने की संभावना कम हो जाती है, जिससे प्यूरीफायर और बेहतर काम करता है।
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शोध क्या बताता है
अध्ययनों में पाया गया है कि कार के अंदर हेपा-ग्रेड प्यूरीफायर, अच्छे केबिन फिल्टर और सही एयर सर्क्युलेशन के साथ पीएम 2.5 व एलर्जन को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
हालांकि, कुछ इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। जैसे अगर यात्रा बहुत छोटी हो या विंडो बार-बार खुलती-बंद होती रहे, तो प्यूरीफायर को हवा साफ करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता।
इसी तरह, सिर्फ केबिन फिल्टर कुछ गैसों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड या कई VOC को नहीं हटा पाते, जब तक कि प्यूरीफायर में अच्छा एक्टिवेटेड-कार्बन लेयर शामिल न हो।
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क्या दिल्ली-एनसीआर में कार एयर प्यूरीफायर लेना फायदेमंद है
दिल्ली और आसपास के इलाकों में गंभीर प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए, एक अच्छा कार एयर प्यूरीफायर बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, खासकर अगर-
- आप रोज भारी ट्रैफिक में लंबा सफर करते हैं,
- स्मॉग के मौसम में अक्सर यात्रा करनी पड़ती है,
- आपको या परिवार के किसी सदस्य को धूल/एलर्जी/सांस की समस्या है।
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सही तरीके से चुना और इस्तेमाल किया गया कार एयर प्यूरीफायर पीएम 2.5, धूल, धुआं और एलर्जन को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन यह अकेला समाधान नहीं है। हवा को वाकई साफ रखने के लिए हेपा-ग्रेड फिल्टर, रीसर्क्युलेशन मोड, खिड़कियां बंद रखना और नियमित मेंटेनेंस ये सभी जरूरी हैं।
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