बंगलूरू का सबसे बड़ा प्रशंसक भी यह मानेगा कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था काफी खराब है। हो सकता है कि गूगल के पास अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बंगलूरू की ट्रैफिक समस्याओं का समाधान हो। जानें डिटेल्स।
कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि बंगलूरू युवा कामकाजी पेशेवरों के लिए भारत का सबसे अच्छा शहर है। तो वहीं बंगलूरू का सबसे बड़ा प्रशंसक भी यह मानेगा कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था काफी खराब है। हो सकता है कि Google (गूगल) के पास अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) (एआई) के जरिए बंगलूरू की ट्रैफिक समस्याओं का समाधान हो।
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इंटरनेट मीम्स और आश्चर्यजनक रूप से, ऐसे समाचारों से भरा हुआ है कि कैसे लोगों ने बंगलूरू के रेंगने वाले ट्रैफिक का समाधान निकालने के लिए काफी विचित्र तरीकों से प्रतिक्रिया दी है।
गूगल की प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट, तकनीकी दिग्गज का एआई से चलने वाला समाधान है। इसका मकसद शहर के अंदर आने-जाने की गतिशीलता को बेहतर बनाना, ट्रैफिक कम करना और कुल मिलाकर लोगों का ट्रैफिक जाम में फंसने से बर्बाद होने वाला समय कम करना है। एनालिटिक्स इंडिया मैगजीन की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
तेजी से बढ़ते शहर बंगलूरू में, गूगल की यह अभूतपूर्व पहल शहरी यातायात प्रबंधन की तस्वीर को बदल रही है। गूगल की प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट चौराहों पर ट्रैफिक फ्लो को ऑप्टिमाइज करेगी। और वाहनों के रुक-रुककर चलने से होने वाले उत्सर्जन को कम करेगी।
इस इनोवेटिव प्रोजेक्ट की शुरुआत गूगल के एक शोधकर्ता डोटन इमानुएल और उनकी पत्नी के बीच रात के खाने की एक सहज बातचीत से हुई थी। 2021 में अपनी स्थापना के बाद से, प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को दूर करते हुए शहरी गतिशीलता में क्रांति लाने के मिशन पर है।
एआई के पावर और गूगल मैप्स डेटा से हासिल जानकारियों का लाभ उठाते हुए, प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट वैश्विक सड़क नेटवर्क की गहन समझ का प्रदर्शन करता है।
ट्रैफिक पैटर्न को मॉडलिंग करके और शहर के ट्रैफिक इंजीनियरों को इंटेलिजेंट सिफारिशें देकर, इसका लक्ष्य ट्रैफिक फ्लो को सुव्यवस्थित करना और उत्सर्जन को कम करना है।
हाल ही में सीबीएस न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में, गूगल में क्लाइमेट एआई की उत्पाद टीम की प्रमुख जूलियट रोथेनबर्ग ने इस प्रोजेक्ट के वैश्विक प्रभाव पर रोशनी डाली थी।
उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट दुनियाभर के 13 शहरों में चालू है, जिनमें बंगलूरू, रियो, हैम्बर्ग और सिएटल शामिल हैं। जो हर रेड लाइट को अनुकूलन के अवसर के रूप में महत्वपूर्ण बनाता है।
शुरुआती आंकड़े आशाजनक नतीजे दर्शाते हैं। जिसमें स्टॉप्स में 30 प्रतिशत तक की संभावित कमी और चौराहों पर उत्सर्जन में 10 प्रतिशत की कमी शामिल है। जिन 70 चौराहों पर प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट पहले से ही एक्टिव है, वहां यह ईंधन की बचत और कम उत्सर्जन में तब्दील हो जाता है। जिससे हर महीने लाखों यात्रियों को फायदा होता है।
वर्तमान में, प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट बंगलूरू, हैदराबाद और कोलकाता सहित 12 शहरों में 70 चौराहों पर चल रही है।
कोलकाता में, इस पहल को पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल से प्रशंसा मिली है, जिन्होंने यातायात दक्षता और सुरक्षा बढ़ाने में इसकी भूमिका की सराहना की है। नवंबर 2022 से, कोलकाता ने 13 चौराहों पर प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट के सुझावों को लागू किया है। जिससे यात्रियों और ट्रैफिक कर्मियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली हैं।