देशभर में लोग कार खरीदने के बाद कई तरह के मोडिफिकेशन करवाते हैं। लेकिन कुछ मोडिफिकेशंस के कारण नुकसान भी होता है और चालान भी कट सकता है। किस तरह के मोडिफिकेशन करवाने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं।
अक्सर लोग अपनी कार को दूसरे से अलग बनाने के लिए कई तरह के मोडिफिकेशन करवाते हैं। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि ऐसे कुछ मोडिफिकेशंस करवाने से बचना चाहिए, जिनसे कार को तो नुकसान होता ही है साथ ही पुलिस भी हजारों रुपये का चालान काट सकती है।
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प्रैशर हॉर्न लगवाना
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car horn
कार कंपनियों की ओर से सरकार के नियमों के मुताबिक वाहन में हॉर्न लगाया जाता है। लेकिन कुछ लोग कंपनी से लगा हॉर्न हटवाकर अपनी पसंद से ज्यादा तेज हॉर्न या प्रैशर हॉर्न को लगा लेते हैं। ऐसे हॉर्न के कारण सड़क पर चलने वाले दूसरे वाहन चालकों को तो परेशानी होती ही है साथ ही इससे नियमों का उल्लंघन भी होता है। कई बार पुलिस की ओर से ऐसे हॉर्न का उपयोग करने वालों का चालान काटा जाता है।
कई कारों में लोग अपनी सुरक्षा के लिए बुल बार लगवाते हैं। कार कंपनियों की ओर से किसी भी कार में बुल बार को लगाकर नहीं दिया जाता। बल्कि एक्सेसरीज के तौर पर लोग इन्हें आफ्टर मार्केट या शोरुम से लगवाते हैं। लेकिन इनसे भी नियमों का उल्लंघन होता है साथ ही यह सुरक्षा से ज्यादा आपकी कार के साथ ही दूसरे लोगों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। दरअसल, इन्हें किसी भी कार की चेसिस पर लगाया जाता है और टक्कर होने पर इससे बचाव की जगह कार के चेसिस को नुकसान हो सकता है, जिसे ठीक करवाना ज्यादा खर्चीला भी हो सकता है।
कई लोग वाहनों के शीशों को काला करवा लेते हैं। ऐसा फिल्म लगवाकर किया जाता है। लेकिन पुलिस की ओर से लगातार ऐसे वाहनों को रोका जाता है और हजारों रुपये का चालान भी काटा जाता है। साथ ही ऐसे वाहनों से फिल्म को मौके पर ही उतारा भी जाता है। कंपनियों की ओर से कार में टिंटेड ग्लास नहीं दिए जाते।
कुछ लोग अपनी कार में आने वाले टायर के साइज से बड़े साइज और चौड़े टायर लगवाते हैं। एक ओर तो इन्हें लगवाने पर चालान भी हो सकता है वहीं दूसरी ओर इनके कारण वाहन का एवरेज काफी कम हो जाता है। जिससे ओनर का अनावश्यक तौर पर खर्च बढ़ता है।
कार कंपनियों की ओर से काफी रिसर्च के बाद किसी भी कार का डिजाइन फाइनल किया जाता है। इसमें छोटी से लेकर बड़ी चीजें भी शामिल होती हैं, जिनमें कार के फ्रंट की ग्रिल भी होती है। लेकिन कुछ लोग कार की फ्रंट ग्रिल को बदलकर दूसरी ग्रिल लगवाते हैं। ऐसा करने से कार को जरूरी मात्रा में हवा नहीं मिल पाती और इंजन पर लोड बढ़ता है। इससे कार का एवरेज तो कम होता ही है साथ ही ज्यादा क्षमता के कारण इंजन के पार्ट्स जल्दी घिसते हैं।