यह टेक्नॉलजी पूरी तरह ऑटोमैटिक नहीं है, लेकिन इसमें इससे जुड़े कुछ फायदे जरूर हैं जैसे AMT में क्लच नहीं होता। ऑटोमैटिक कारों की तुलना में ये काफी सस्ती होती है। इतना ही नहीं मैनुअल ट्रांसमिशन की तरह इसकी माइलेज भी काफी बढ़िया आती है। मेंटेनेंस बहुत ज्यादा नहीं आती। भारत की संकरी और खराब सड़कों पर आम कारों के मुकाबले ऑटोमेटिक कारों को चलाना और उनको हैंडल करना आसान होता है। अगर आप पहली बार कार चलाना सीख रहे हैं तो आपके मैन्युअल से ज्यादा ऑटोमेटिक कारें बेहतर साबित होंगी क्योकिं क्लच और गियर चेंज करने से छुटकारा मिल जाता है। यही वजह है कि भारत में AMT टेक्नॉलजी को तेजी से अपनाया जा रहा है। कंसल्टेंसी फ्रॉस्ट ऐंड सुलिवंस की ऐनालिसिस के मुताबिक, 2020 तक ऑटोमैटिक गाड़ियों की सेल्स 5 लाख यूनिट्स तक पहुंच जाने का अनुमान है।
ऑटो एक्सपर्ट मानते हैं कि AMT कारें मैन्युअल की तुलना में करीब 30 से 35 हजार रुपये ज्यादा है, जोकि बहुत बड़ा अंतर नहीं कहा जा सकता। यही वजह है की लोग अब AMT कारों को ज्यादा भाव देने लगे हैं। इनको ड्राइव करना बेहद आसान है और माइलेज भी काफी बढ़िया मिलती है, इतना ही नहीं हैवी ट्रैफिक में भी आप कूल होकर ड्राइव करते हो। जबकि मैन्युअल कार में बार-बार क्लच और गियर बदलने से न सिर्फ कार को नुकसान होता है बल्कि ड्राइव करने का मन भी नहीं करता।
इस समय मार्किट में कई AMT वाली कारें आ चुकी हैं जिनमें मारूति ऑल्टो K10, टाटा टियागो, डैटसन रेडी-गो, रेनो क्विड, मारूति वैगन-आर और टाटा की टियागो जैसी कारें मौजूद हैं।