मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक नितिन गडकरी ने सरकारी विभाग और सार्वजनिक उपक्रमों के स्वामित्व वाले वाहनों को डी-रजिस्टर करने और उन्हें कबाड़ घोषित करने की नीति को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 15 साल पुराने वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाएगा। यह नीति एक अप्रैल 2022 से लागू होगी। फिलहाल सरकार 2022 से इसे लागू करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
यह नीति उन वाहनों पर लागू होगी, जो 15 साल से पुराने हैं। वहीं इनमें न केवल निजी वाहन शामिल होंगे बल्कि सरकारी और पीएयूवी विभागों की गाड़ियां भी शामिल होंगी। वहीं पॉ़लिसी को लेकर अधिसूचना इसके 01 अप्रैल 2022 से लागू होने से पहले ही जारी की जाएगी।
जुलाई 2019 में वाहन कबाड़ नीति को शामिल करने को लेकर मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया गया था। इसके तहत पुराने वाहनों को सड़क से हटाने और नए सुरक्षित और कम प्रदूषण पैदा करने वाले वाहनों के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति बनाई गई थी।
ठीक रखरखाव के बावजूद प्रदूषण
पिछले कुछ सालों में भारत के वाहन बाजार में काफी गति आई है। अगर पुराने प्रदूषण उत्सर्जन मानकों से तुलना करें, तो साल 2005 से पुराने वाहन नए मानकों से 10 से 25 फीसदी तक ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। यहां तक कि अगर इन वाहनों का रखरखाव सावधानी से भी किया जाए, तो भी वे उत्सर्जन मानकों से ज्यादा प्रदूषण करेंगे। साथ ही सड़क सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हैं।
वाहनों का डाटाबेस भी बनेगा
साथ ही इस नीति में गाड़ी में लगे एयरबैग्स को वैज्ञानिक तरीकों से डिस्पोजल के साथ साइलेंसर में मिलने वाली धातुओं और रबर का इको-फ्रेंडली तरीके से निपटान किया जाएगा। वहीं गाड़ी से निकलने वाले इंजन ऑयल को जमीन पर नहीं फैंका जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों से निपटा जाएगा। स्टील मंत्रालय ऐसे स्क्रैपिंग सेंटर्स पर काम कर रहा है और सड़ मंत्रालय इन्हें मान्यता देगा। साथ ही, किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए ऐसे वाहनों का डाटाबेस भी बनाया जाएगा।