भारत में या विदेशों में बेची जाने वाली ज्यादातर कारें डिजाइन या फीचर्स और आराम के मामले में एक लंबा सफर तय कर चुकी हैं। एक सामान्य फीचर जो आजकल मॉडर्न मानी जानेवाली ज्यादातर कारों में मिलता है वह है टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट स्क्रीन। ज्यादातर कार निर्माताओं ने नॉब और बटन का इस्तेमाल छोड़ दिया है और ऐसा केबिन बनाने लगे हैं जिसमें कोई असली नॉब और बटन नहीं लगे हैं। हालांकि, इससे केबिन को एक ज्यादा अपमार्केट फील मिलता है, लेकिन अब एक अध्ययन से पता चला है कि कार चलाते समय टचस्क्रीन का उपयोग करने वाले लोगों में विचलित होने की प्रवृत्ति होती है।
यह शोध ब्रिटिश सरकार की एक पूर्व एजेंसी ने किया है जो अब एक स्वतंत्र परीक्षण सुविधा के रूप में चलती है। टचस्क्रीन कितनी बुरी तरह से ड्राइवर का ध्यान हटा सकता है, इसका परीक्षण करने के लिए, एजेंसी ने कई प्रयोग किए। उन्होंने प्रयोग करने के लिए 20 लोगों का चयन किया था। इन 20 लोगों में से 10 एंड्रॉइड ऑटो का उपयोग कर रहे थे जबकि अन्य 10 एपल कारप्ले का इस्तेमाल कर रहे थे।
ड्राइवरों को 15 मिनट के लिए एक सिम्युलेटर में ड्राइव करने के लिए कहा गया और इस दौरान नेविगेशन, संगीत बजाने के लिए गाना चुनना, रेडियो स्टेशनों का चयन करना और इसी तरह के कई काम के लिए टचस्क्रीन का उपयोग करने के लिए कहा गया। प्रयोग के दूसरे चरण में इन ड्राइवरों को वॉयस कमांड फीचर का उपयोग करने के लिए कहा गया जो आधुनिक कारों में यह सभी काम करने के लिए आम होता जा रहा है। तीसरे चरण में, ड्राइवरों को कुछ भी नहीं करने और बस सिम्युलेटर में ड्राइव करने के लिए कहा गया।
सिम्युलेटर में ड्राइविंग करते समय, रिसर्च टीम ने स्क्रीन पर एक लाल रौशनी डाली जो हाई बीम की नकल है, सामने जा रही कार या विपरीत दिशा से आने वाली कार की पास लाइट या टेल लाइट जैसी चीजों का माहौल पैदा किया गया। जितनी बार, स्क्रीन पर लाल बत्ती चमकती थी, ड्राइवरों को सिम्युलेटर पर हेडलाइट्स को फ्लैश करके जवाब देना था। टचस्क्रीन का उपयोग करने वाले ड्राइवरों को वॉयस कमांड का उपयोग करने की तुलना में जवाब देने में ज्यादा समय लगा। भले ही अंतर कुछ सेकंड था, लेकिन हाईवे पर यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
इस सर्वेक्षण के मुताबिक, वॉयस कमांड फीचर टचस्क्रीन का इस्तेमाल करने की तुलना में ज्यादा सुरक्षित था। ब्रिटिश कार पत्रिका के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा कारें टचस्क्रीन से लैस हैं, जिसकी वजह से नॉब या बटन के इस्तेमाल की तुलना में टचस्क्रीन के जरिए फैन स्पीड की रफ्तार को एडजस्ट करने में लगने वाले समय बढ़कर दोगुना हो गया है और रेडियो स्टेशन को चुनने में 8 गुना ज्यादा समय लगता है। यह बहुत खतरनाक है क्योंकि ड्राइवर का ध्यान बंट जाने पर दुर्घटना होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।
ये सभी फीचर्स कार को अंदर से अधिक प्रीमियम और फ्यूचरिस्टिक बनाने के लिए बनाई गई हैं। पूरी तरह से बिना नॉब वाले इंटरफेस के बजाय, कार निर्माताओं को दोनों बटन और टच इनपुट के मिश्रण के साथ स्क्रीन विकसित करने पर विचार करना चाहिए ताकि ड्राइवर स्क्रीन पर देखने की तुलना में ड्राइविंग पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकें। आने वाले वर्षों में, ज्यादा कारें वॉयस रिकॉग्निशन (आवाज पहचान की सुविधा) से लैस होंगी, जो ड्राइवरों के लिए मददगार साबित होंगी कि उनका ध्यान सड़कों पर कम भटके।