केन्द्र सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए नए-नए कदम उठा रही है। अगर आप इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना चाहते हैं, तो उसे चार्ज करने के लिए आपको दर-दर धक्के खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसकी वजह है कि हाल ही में सरकार ने नए नियम जारी करते हुए कहा है कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए किसी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं है।
पिछले हफ्ते ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जारी गाइडलाइंस और स्टैंडर्ड के मुताबिक ई-वाहनों को चार्ज करने के लिए पॉवर टैरिफ उचित कमीशन द्वारा तय किए जाएंगे, आपूर्ति की औसत लागत से और 15% से ज्यादा न हो। वहीं अपने घर में चार्जिंग स्टेशन लगाते हैं, तो घरेलू दरों के हिसाब से बिजली की दरें वसूली जाएंगी। देश में फिलहाल लगभग 500 चार्जिंग स्टेशन हैं। नए नियमों के तहत अब कोई भी व्यक्ति या संस्था पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगा सकता है, लेकिन इसके लिए ऊर्जा मंत्रालय और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) के मानदंडों को पूरा करना जरूरी होगा।
उम्मीद जताई जा रही है कि नए नियमों से इलेक्ट्रिक औय हाइब्रिड वाहनों की निर्माण में तेजी आएगी। वहीं सरकार भी अगले साल अप्रैल में फेम स्कीम (फास्टर एडोप्शन एंड मैन्यूफेक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल्स) का दूसर चरण शुरू करने जा रही है। फेम 2 के तहत अगले पांच सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों को 5500 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद दी जाएगी।
इसके अलावा सरकार दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में तकरबीन 1000 चार्जिंग स्टेशन खोलने जा रही है। टाटा पावर इस योजना में 70 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। टाटा पावर के फिलहाल मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद में 21 चार्जिंग स्टेशन हैं। टाटा पॉवर के चार्जिंग स्टेशनों पर गाड़ियां महज 90 मिनट में जीरो से फुल चार्ज हो सकेंगी, वहीं सामान्य चार्जर के जरिए फुलचार्ज करने में सात घंटे तक लग जाते हैं। टाटा पावर तेल कंपनियों हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के साथ मिलकर इस योजना को अंजाम देगी
वहीं मारुति सुजुकी, हुंडई, वोल्वो और किआ मोटर्स ने पहले ही इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड व्हीकल्स बनाने की घोषणा कर चुकी हैं। वहीं टाटा मोटर्स और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा पहले ही सरकार को इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति कर रही है। इससे पहले कई कंपनियां ई-वाहनों की चार्जिंग को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का मुद्दा जोरशोर से उठा चुकी हैं। सरकार फेम 2 के तहत पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने पर एक हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी भी देगी।
फेम 2 के पहले चरण में मुंबई, दिल्ली, बंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और सूरत के एक्सप्रेस वे और हाईवे को जोड़ा गया। पहला चरण तीन साल तक चला था। वहीं फेम के दूसरे चरण में राज्यों की राजधानी, केन्द्र शासित प्रदेशों के हाईवे को जोड़ा जाएगा, जो अप्रैल 2019 से शुरू होगा। इसके लिए मंत्रालय एक केन्द्रीय नोडल एजेंसी बनाएगा।