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Maruti Suzuki ने क्यों लिया डीजल गाड़ियां ना बनाने का फैसला?

Thu, 03 Jan 2019 10:17 AM IST
भावना चौधरी ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Maruti may discontinue diesel cars
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भारत की सबसे पुरानी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने आॅटो मार्केट में हलचल मचा दी है। बता दें, कंपनी अपनी डीजल कारों के प्रोडक्शन पर कुछ दिन लगाम लगाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के ऐसा करने के पीछे लागू होने वाले BS6 एमिशन हो सकते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक मारुति सुजुकी गुड़गांव में अपने डीजल इंजन असेंबली प्लांट  बंद करने पर भी विचार कर रही है। 

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क्या है कारण
सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2020 तक सभी BS-4 वाहनों पर रोक लगाए जाने की घोषणा की। जिसके बाद वाहन कंपनियां BS6 वाहनों पर तेजी से काम कर रही हैं। BS6 एमिशन नॉर्म्स लागू होने के बाद डीजल इंजन की कीमतों में भी 1 से 2 लाख रुपए तक का इजाफा होगा। जिसका सीधा असर कार की कीमतों पर पड़ेगा। मारुति शुरुआत से ही अपने ग्राहकों को वैल्यू फॉर मनी देने के लिए जाना जाता है। वहीं BS6 के आने से कंपनी अपनी क्वालिटी के साथ कोई समझोता नहीं करना चाहती। 

air pollution - फोटो : file photo
क्या हैं बीएस वाहन
बीएस उत्सर्जन मानक वे मानक होते हैं जो भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं। इस उत्सर्जन मानक के जरिये मोटर वाहनों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण की मात्रा की व्याख्या की जाती है। 

क्या है बीएस के आगे लिखी संख्या 
अक्सर आप सुनते होंगे बीएस-2 वाहन, बीएस-3 वाहन और बीएस-4 वाहन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन संख्याओं का मतलब क्या है? बीएस के आगे संख्या के बढ़ते जाने का मतलब है उत्सर्जन के बेहतर मानक, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं। भारत में गाड़ियों के प्रदूषण को मापने के लिए बीएस का इस्तेमाल किया जाता है।

बीएस के आगे जितना बड़ा नंबर लिखा होता है उस गाड़ी से उतने ही कम प्रदूषण होने की संभावना होती है। ये बीएस मानक देश का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। साथ ही देश में चलने वाली हर गाड़ी के लिए यह आवश्यक होता है कि वह इन सभी मानकों पर खरी उतरे।
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car pollution

उत्सर्जन मानक क्या होता है?
गाड़ियों के फ्यूल से निकलने वाले पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए मानदंड तय किए जाते हैं जिन्हें उत्सर्जन मानक कहा जाता है और सभी ऑटोमोबाइल कंपनियो को इन मानकों का पालन भी करना होता है ताकि वायु प्रदूषण कंट्रोल किया जा सके।

गाड़ियों का उत्पादन करते समय, इंजन में एक इंटरनल एक्युपमेंट का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि प्रदूषण कम से कम हो। भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से एमिशन नॉर्म्स की जांच और तय समय-सीमा के अंदर इसे पूरी तरह से लागू करने का काम किया जाता है।

भारत स्टेज उत्सर्जन मानक कब और कहां:
देश में भारत स्टेज उत्सर्जन मानक को 4 स्टेज में बांटा गया है जिसे अलग-अलग तरीके से पूरे देशभर में लागू किया जाना है। इसमें टू-व्हीलर से लेकर हेवी कमर्शियल व्हीकल शामिल हैं।

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