Maruti Suzuki (मारुति सुजुकी) ने अपनी LCV (लाइट कमर्शियल व्हीकल) Super Carry (सुपर कैरी) को नए BS6 ईंधन उत्सर्जन मानकों वाले पेट्रोल सीएनजी इंजन के साथ लॉन्च किया है। इस LCV की एक्स-शोरूम कीमत 5.07 लाख रुपये रखी गई है। इसके साथ ही सुपर कैरी ऐसा पहला हल्का वाणिज्यिक वाहन बन गया है जिसे BS6 इंजन में अपग्रेड किया गया है और मारुति सुजुकी की BS6 मानक वाले एस-सीएनजी श्रेणी के वाहनों में छठा है।
इंजन
सुपर कैरी में 1.2-लीटर 4-सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलता है। यह इंजन 6,000rpm पर 65PS का पावर और 3,000rpm पर 85Nm का टार्क जनरेट करता है। सुरक्षा और सुविधा की बात करें तो, सुपर कैरी रिवर्स पार्किंग सेंसर, सीट बेल्ट रिमाइंडर, लॉक करने योग्य ग्लभ बॉक्स और एक बड़े लोडिंग डेक जैसी फीचर्स के साथ आता है।
सुपर कैरी की बिक्री
लॉन्च का जिक्र करते हुए, मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक (विपणन और बिक्री) शशांक श्रीवास्तव ने कहा, "मारुति सुजुकी के 320 से ज्यादा वाणिज्यिक चैनल नेटवर्क के जरिए 56,000 से अधिक यूनिट्स की बिक्री के साथ, सुपर कैरी लगातार मिनी ट्रक सेगमेंट में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। यह विशेष रूप से छोटे वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट उपयोगकर्ता के लिए बनाई गई थी।"
उन्होंने आगे कहा, "सुपर कैरी ने कारोबार को मुनाफा कमाने में मदद की है। यह एक तथ्य से कि यह मॉडल लॉन्च होने के सिर्फ दो साल के भीतर दूसरा सबसे अधिक बिकने वाला मॉडल बन गया है। लघु वाणिज्यिक वाहन बाजार में बाइ-फ्यूल एस-सीएनजी वेरिएंट को बहुत अच्छी तरह से स्वीकार किया गया है और पहले से ही सुपर कैरी बिक्री में लगभग 8 फीसदी का योगदान देता है। प्रतिस्पर्धात्मक रूप से कीमत वाले BS6 एस-सीएनजी वेरिएंट की शुरूआत सरकार के सीएनजी ईंधन उपलब्धता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के साथ ही सुपर कैरी ब्रांड और मजबूत बनेगा।"
सीएनजी सेगमेंट में इस वाहन को पहली बार 2010 में उतारा गया था। तब से कंपनी ने अब तक 10 लाख से अधिक ग्रीन वाहनों की बिक्री की है जिसमें सीएनजी और स्मार्ट हाइब्रिड वाहन शामिल हैं। मारुति सुजुकी का कहना है कि इसकी एस-सीएनजी वाहन रेंज भारत सरकार के तेल आयात को कम करने और देश की ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 6.2 फीसदी से बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करने के दृष्टिकोण के मुताबिक है। इसके साथ ही पिछले वर्ष में नए सीएनजी स्टेशन में 56 फीसदी की वृद्धि को सही दिशा में उपायों के रूप में देखा जा रहा है। पिछले साल 477 नए स्टेशन बनाए गए, जबकि पिछले 5 सालों में औसत 156 स्टेशन बने थे।