इसके अलावा डीलरों की तरफ से मारुति सुजुकी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने उन्हें ग्राहकों को अतिरिक्त छूट देने की अनुमति नहीं दी है। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जांच टीम ने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मारुति सुजुकी ने डीलरों के बीच प्रतियोगिता खत्म करने की कोशिश की है। साथ ही यह जांचने के लिए कि छूट दी जा रही है या नहीं, इसके लिए मारुति डीलरों पर कड़ी नजर रखने के लिए फर्जी ग्राहक भी भेजती थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी को जैसे ही पता चलता था कि डिस्काउंट ऑफर किए जा रहे हैं, तो मारुति उन डीलर्स पर दंड भी लगाती थी।
मामले की जांच 2019 में शुरू की गई थी, जब एक डीलर ने शिकायत की कि कंपनी ने डीलरों से ग्राहकों को अतिरिक्त डिस्काउंट देने से मना किया है। हालांकि अभी ये रिपोर्ट आयोग को सौंपी गई है, आयोग के पास ये अधिकार है कि वह चाहे तो इस पर संज्ञान ले सकता है या इसे अस्वीकार भी कर सकता है। अगर आयोग इस रिपोर्ट को स्वीकार करता है तो फाइनल ऑर्डर देने से पहले वह सुनवाई कर सकता है। इसके लिए माकुति सुजुकी को समन भेजा जा सकता है।
सीसीआई को जून 2019 में मिली शिकायत में देश की सबसे बड़ी कार कंपनी पर कार बेचते समय बीमा योजनाएं सुझाने का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्राहकों को बाजार में उपलब्ध विकल्पों की तुलना में ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है। शिकायत के आधार पर सीसीआई इस बात की जांच कर रहा है कि क्या मारुति ऐसी ‘व्यवस्था’ में लिप्त है, जिसमें कार कंपनी ल्युब्रिकेंट या बीमा जैसी वस्तुओं के लिए अपने पसंदीदा आपूर्तिकर्ता को बढ़ावा देती है। भारतीय कानून कहता है कि ऐसी प्रक्रियाएं प्रतिस्पर्धा रोधी हैं, जो प्रतिस्पर्धा को खत्म करती हैं और उपभोक्ता के लिए विकल्पों को सीमित करती हैं।