FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा, "हार्ले-डेविडसन इंडिया के कर्मचारियों और भारत में हार्ले-डेविडसन की 33 डीलरशिप के लिए यह खबर आश्चर्यजनक रूप से सामने आई" उन्होंने आगे कहा कि भारत में हार्ले-डेविडसन के डीलरों को कोई जानकारी नहीं दी गई थी, जिन्होंने ब्रांड में निवेश किया था।
न्यूज एजेंसी रॉयटर के मुताबिक, कंपनी के रीस्ट्रेक्चर के लिए 75 मिनियन डॉलर की जरूरत है, जिसके चलते कंपनी ने अपना प्रोडक्शन और सेल्स रोक दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हार्ले ने अपनी कुल बिक्री का केवल 5 फीसदी ही भारत में सेल किया है। दरअसल कंपनी की तरफ से पिछले कुछ समय से इसके संकेत दिए जा रहे थे।
Harley Davidson ने पिछले वित्तवर्ष में भारत में 2,500 से भी कम यूनिट्स की बिक्री की थी। माना जा रहा है कि कंपनी के इस फैसले का एक बड़ा कारण कोरोना वायरस महामारी भी है, जिसके चलते भारत में इसके ऑपरेशन्स को भारी नुकसान पहुंचा है।
हार्ले की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में लिया गया, जब कंपनी ने भारत में 10 साल पूरे कर लिए थे। इससे पहले आई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि Harley-Davidson भारतीय बाजार में अपना ऑपरेशन बंद कर सकती है। रिपोर्ट में बताया गया था कि भारतीय बाजार में कम बिक्री और भविष्य में भी अपनी बाइक्स के लिए बेहतर मांग को नहीं देखते हुए कंपनी भारत में अपने असेंबली ऑपरेशंस को बंद करने पर विचार कर रही है।
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से हार्ले-डेविडसन भारत में परिचालन बंद करने वाली अमेरिका की दूसरी वाहन निर्माता है। इससे पहले जनरल मोटर्स ने अपने घरेलू परिचालन को समेट कर 2017 में अपने गुजरात प्लांट को बेच दिया था।